वाराणसी। मातृभाषा का कोई विकल्प नहीं है। यह हमे गौरव का एहसास कराती है। हम लोगों ने मात्र कुछ लोगों के लिए अपनी पूरी व्यवस्था बदल दी है। हमें अपनी भाषा व क्षेत्रीय भाषाओं के मूल्यों को समझना होगा। अखिल भारतीय भाषाओं में हिंदी को भी प्राथमिक भाषा में रखा जाए। उक्त विचार लखनऊ के महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने व्यक्त किए। वह शनिवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के शिक्षा संकाय सभागार में भारतीय भाषा अभियान, विधि संकाय व विद्याश्री न्यास ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा पखवाड़ा समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
इंदिरा गांधी जनजातीय विश्वविद्यालय के प्रो. दिलीप सिंह ने कहा कि भाषा के उत्थान के लिए लिए हमारी संस्थाओं को आगे आना होगा। अतुल कोठारी ने कहा कि भाषा हमारी संस्कृति की संवाहिका है। मां, मातृभाषा और मातृभूमि का कोई विकल्प नहीं है। प्रो. चतुर्भुज नाथ तिवारी ने कहा कि हमें अंग्रेजियत को किनारे करना होगा।
मातृभाषा के संवर्धन में लगे बनारस के अधिवक्ताओं का सम्मान किया गया। इसमें शिवपूजन सिंह गौतम (अध्यक्ष सेंट्रल बार), राजेश मिश्र (अध्यक्ष बनारस बार), बृजेश मिश्र (महामंत्री), अशोक सिंह प्रिंस, आरपी पाडेय, विवेक शंकर तिवारी और दुर्गा प्रसाद आदि अधिवक्ताओं का सम्मान किया गया।