वाराणसी। बीएचयू समाज विज्ञान संकाय में चल रहे वार्षिक युवा महोत्सव अभिकल्पन के पांचवें दिन मंगलवार को सांस्कृतिक संध्या में जाने माने गायक और राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व छात्र भूपेन हजारिका को सुरों की श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान लोकगायिका कल्पना पटवारी ने भूपेन हजारिका के गीत गंगा बहती है अपार, प्रजा दोनों पार करे हाहाकार, नि:शब्द सदा ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो गाकर गंगा के निर्मलीकरण का संदेश दिया। इसके अलावा भिखारी ठाकुर की रचना गंगा जी रखिया हो चरनन की भी प्रस्तुति की।
विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता भवन सभागार में कल्पना पटवारी सुनने के लिए छात्र-छात्राओं की भीड़ उमड़ी रही। असमिया गीत से लेकर भोजपुरी गीतों के लिए प्रसिद्ध कल्पना ने पहले अतिथियों के साथ भूपेन हजारिका और महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन कर आशीर्वाद लिया, इसके बाद भजनों से कार्यक्रम की शुरुआत की। रात करीब आठ बजे से शुरू होकर दो घंटे तक चले कार्यक्रम में कल्पना ने भूपेन हजारिका के गीत दिल हूम हूम करे, घबराए... की प्रस्तुति की तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इसके बाद समय ओ धीरे चलो बुझ गयी राह से छाव, दैय्या रे दय्या कैसो रे पापी बिछुआ, विद्रोह गीत ए डोला की प्रस्तुति की। भोजपुरी गीत घरे छुट्टी लेके और कुछ दिन रहिए बलम जी की प्रस्तुति की तो छात्र-छात्रा अपने को रोक नहीं पाए और थिरकते रहे। इससे पहले समाज विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. आरपी पाठक, छात्र सलाहकार डॉ. अभिनव शर्मा और डॉ. सत्यपाल ने कल्पना को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन शाश्वत उपाध्याय ने किया। इस दौरान दिव्य कुमार जायसवाल, कौन्तेय राय, प्रखर प्रताप, सारंग, कौस्तुभ सिंह आदि मौजूद रहे।