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महामना की बगिया में बिखरे लोककला के रंग

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वाराणसी। युवा प्रवासी भारतीय दिवस के मंच पर सोमवार को महामना की बगिया (बीएचयू) में लोककला के विविध रंग बिखरे। नादयात्रा में जहां वाद्ययंत्रों (तबला, सितार, बांसुरी, हारमोनियम) की बेहतरीन जुगलबंदी देखने को मिली, वहीं कलर्स आफ बनारस में दादरा, कजरी, होरी की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों ने प्रवासियों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। अंत में भरतनाट्यम, कथक से कलाकारों ने सभी का दिल जीत लिया।
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बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में संगीत एवं मंच कला संकाय के प्रमुख प्रो. राजेश शाह के निर्देशन में आयोजित सांस्कृतिक संध्या की शुरूआत प्रो.के शशि कुमार के निर्देशन में गंगा स्तुति से हुई। इसमें प्रो. के शशि कुमार, डॉ. केए चंचल, डॉ. रामशंकर ने अपनी टीम के साथ पतित पावनी गंगा गीत के माध्यम से गंगा की अविरलता, निर्मलता का गुणगान किया। इसके बाद कलर्स आफ बनारस में प्रो. संगीता पंडित, प्रो. रेवती साकलकर, प्रो. शारदा वेलंकर, डॉ. मधुमिता भट्टाचार्या ने दादरा सांवरिया प्यारा रे और होरी रंग डालूंगी नंद के लालन पर के माध्यम से कृष्ण और गोपियों के बीच ठिठोली का भाव दर्शाया। कजरी कइसे खेलन जइबू सावन में कजरिया, पिया मेंहदी मंगाई द मोतीझील से, जाइके साइकिल से न गीत की प्रस्तुति पर पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। तबले पर पंकज राय, अभिनव नारायण आचार्य, हारमोनियम पर डॉ. इंद्रदेव चौधरी, बांसुरी पर सनीष गावली ने संगत किया। इसके बाद नादयात्रा में प्रो. प्रवीण उद्धव के निर्देशन में सितार, बांसुरी, संतूर, हारमोनियम की जुगलबंदी प्रस्तुत हुई। इसमें हेमंत राग, सोहनी में तालयात्रा के साथ ही तबले पर पं. किशन महाराज, पं.लच्छू महाराज, शारदा सहाय की बंदिश बजाकर बनारस घराने से रूबरू कराया गया। सितार पर डॉ. प्रेम किशोर मिश्र, सारंगी पर कन्हैया लाल मिश्र, बांसुरी पर राकेश कुमार, मृदंगम डॉ. सत्यवर, हारमोनियम पर डॉ. विजय कपूर ने संगत किया। इस दौरान डॉ. ज्ञानेश चंद्र पांडेय के निर्देशन में वंदेमातरम पर गीत और नृत्य की प्रस्तुति की गई।
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