वाराणसी। काशी की कला व हस्तशिल्प के लिए मंगलवार का दिन बेहद खास रहा। जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हस्तशिल्प उत्पाद स्मृतिचिह्न के रूप में दिया गया तो वहीं महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के दीक्षांत समारोह में रामनाईक सहित अन्य अतिथियाें को भी इसी प्रकार के स्मृतिचिह्न प्रदान किए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने भाषण के बीच-बीच में काशी के हस्तशिल्प की ब्रांडिंग करते रहे।
बीएचयू एंफीथिएटर में कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने वंदेमातरम लिखा अंगवस्त्रम् देकर किया। वहीं गीता के श्लोक लिखे अंगवस्त्रम् से मुख्यमंत्री का स्वागत भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र पांडेय ने किया। जीआई पंजीकृत बनारस ब्रोकेड के कैलीग्राफी अंगवस्रम् के साथ ही पीएम को वुडेन क्राफ्ट के पंचमुखी हनुमान की मूर्ति भी प्रदान की गई। मुख्यमंत्री को पंचमुखी गणेश की प्रतिमा भेंट की गई। वहीं महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल राम नाईक को भी पंचमुखी गणेश की प्रतिमा और गीता श्लोक बुना अंगवस्त्र भेंट स्वरूप कुलपति ने दिया। अंगवस्त्रों को कैलीग्राफी विधि से हैंडलूम पर सारनाथ के छाही गांव के मास्टर बुनकर ने 15 दिन के कठिन परिश्रम से तैयार किया। कॉटन का ताना और सिल्क के बाना पर बुना यह बुना गया। पूर्व में भी इसी बुनकर के बनाए अंगवस्त्र को प्रधानमंत्री सहित विभिन्न राष्ट्राध्यक्ष को दिया जा चुका है। जीआई विशेषज्ञ डॉ. रजनीकांत ने बताया कि वाराणसी की जीआई पंजीकृत लकड़ी के खिलौने अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। बीच में यह प्राचीन कला लुप्त होने लगी लेकिन जीआई पंजीकरण के उपरांत पुन: काष्ठकला के शिल्पियों के हुनर की पहचान मजबूत हो रही है। अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से मांग बढ़ी है।