वाराणसी। चौकाघाट-लहरतारा फ्लाईओवर हादसे से पहले पिलर नंबर 79 व 80 के बीच बीम जी 3 की लोअरिंग का काम यानी उन्हें नियत स्थान पर फिक्स करने के दौरान पैदा हुआ कंपन हादसे की अहम वजह बना। इसी दौरान जी 3 और जी 4 के बीच लगी सरिया सपोर्ट दिए बगैर काट दी गई थी। इसके बाद बीम जी 4 और जी 5 को कोई अतिरिक्त सपोर्ट नहीं दिया गया। साथ ही, पिलर नंबर 79 व 80 के बीच पांच बीम रखने के दौरान तीन तरह की मिश्रित तकनीक का उपयोग किया गया, यह पूरी तरह से गलत था। बीम जीरो डिग्री बैलेंस पर होनी चाहिए थी लेकिन जी 4 और जी 5 के साथ ऐसा नहीं था। ऐसी ही दस अहम खामियों की कीमत 15 लोगों को जान देकर चुकानी पड़ी।
क्राइम ब्रांच के अनुसार चौकाघाट फ्लाईओवर के निर्माण कार्य की कभी सेफ्टी ऑडिट नहीं कराई गई। इंजीनियरिंग मानकों का कड़ाई से पालन नहीं किया गया। संभावित दुर्घटना का आकलन और उसके अनुसार सुरक्षा का मुकम्मल उपाय ना करने की बजाय सब कुछ भगवान भरोसे चलते रहने देने की सेतु निगम के अधिकारियों की प्रवृत्ति ने हादसे को दावत दी। पिलर पर बीम रखे जाने जैसे 55 टन से ज्यादा के लोड ट्रांसफर संबंधी महत्वपूर्ण कार्यों के पहले और बाद में सेतु निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर से लेकर अवर अभियंता तक निरीक्षण नहीं करते थे। सब कुछ मजदूरों हवाले छोड़ दिया गया था। कभी इस बिंदु पर विचार नहीं किया कि बीम रखे जाने जैसे जोखिम भरे काम के दौरान क्या सुरक्षा उपाय किया जाए। रुटीन निरीक्षण भी नहीं किया जाता था। मिश्रित तकनीक का रैंडम प्रयोग किया गया यानी इसके अनुसार जब जहां जो मन किया वहां वो कर दिया। यदि अधिकारी निरीक्षण भी करने जाते थे तो सुरक्षा मानकों के प्रति ध्यान नहीं देते थे। इस तरह से सेतु निगम के अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों ने सामूहिक रूप से इंजीनियरिंग और सुरक्षा मानकों की अनदेखी दो बीम के सड़क पर गिरने की अहम वजह बनी।