ज्ञानपुर। केंद्र सरकार के 14वें वित्त की धनराशि से जिले के सभी 1117 परिषदीय स्कूलों का कायाकल्प किया जाएगा। दो अक्तूबर तक सभी विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित कर आदर्श बनाया जाएगा। पहले चरण में चयनित 30 स्कूलों मॉडल बनाया जा चुका है जबकि दूसरे चरण में चयनित 30 स्कूलों पर काम चल रहा है। अब दो अक्टूबर 2018 तक सभी स्कूलों का मॉडल बनाने की तैयारी है।
शिक्षा की रीढ़ कहे जाने वाले परिषदीय स्कूलों पर सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन बच्चों को बेहतर सुविधाएं मयस्सर नहीं हो पातीं। यही वजह है कि अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में ही पढ़ाते हैं। स्कूलों की दशा सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने पहल की है। 14वें वित्त में भेजी जाने वाली धनराशि से सरकारी स्कूलों को मॉडल बनाने का निर्देश दिया गया है। साल भर पूर्व शासन के निर्देश पर तत्कालीन जिलाधिकारी विशाख जी ने परिषदीय स्कूलों को आदर्श बनाने की मुहिम शुरू की थी, जिसमें 30 स्कूलों को चिह्नित कर काम शुरू किया गया था। अब ये विद्यालय आदर्श स्कूल बन चुके हैं। इनमें प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय जोरईं, महुआपुर, सर्रोई समेत अन्य स्कूल शामिल हैं।
प्रथम चरण में मॉडल बने स्कूल अंग्रेजी माध्यम के निजी विद्यालयों को अब मात देने लगे हैं। इसी क्रम में दूसरे चरण में 30 स्कूल चिह्नित किए गए हैं, जिन्हें आदर्श बनाने का काम चल रहा है। अब तीसरे चरण में बाकी सभी स्कूलों को मॉडल बनाने की पहल शुरू कर दी गई है। ग्राम पंचायत की कार्ययोजनाओं में स्कूल को मॉडल बनाने को प्राथमिकता से रखा जा रहा है। जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल त्रिपाठी ने बताया कि दो अक्टूबर तक स्कूलों को मॉडल बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ग्राम प्रधानों की देखरेख में काम काम होंगे।