सीतामढ़ी। मां गंगा के पावन तट पर स्थित बाबा धवासानाथ आश्रम के स्वयंभू बाबा महादेव मंदिर प्रांगण में मंगलवार को रुद्र महायज्ञ का भव्य आयोजन आरंभ हुआ। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और जयघोष से वातावरण शिवमय हो उठा। महाअनुष्ठान की शुरुआत पहले दिन भव्य कलश यात्रा से हुई। इसके बाद शुरू हुई कथा में देवाधिदेव महादेव के महात्म्य पर चर्चा हुई।
इसमें बड़ी संख्या में कन्याओं और महिलाओं ने कलश में गंगाजल भरकर क्षेत्र भ्रमण किया। कलश यात्रा बनकट और आसपास के गांवों का भ्रमण करते हुए यज्ञ स्थल पहुंची। वहां विद्वान आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ मंडप में कलश स्थापना कराई। इस बीच बाबा भोलेनाथ के जयकारे से वातावरण गुंजायमान होता रहा। आचार्य पवन शुक्ला शास्त्री ने कहा कि यज्ञ से निकलने वाले धुएं से वायुमंडल का वातावरण शुद्ध होने के साथ ही पर्यावरण भी संतुलित रहता है। उन्होंने कहा कि यज्ञ के दौरान हवन करने से मनुष्य के समस्त पापों का नाश हो जाता है। पहले दिन कथा सुनाते हुए मानस मर्मज्ञ मनोज चौबे शास्त्री ने कहा कि भगवान शिव मंगलकारी और सर्व कल्याणकारी हैं। पुरुषोत्तम मास शिव महापुराण कथा के लिए सर्वोत्तम मास होता है। कथा सुनाते हुए कहा कि शंकर जी की महिमा अपरंपार है। वह समस्त जगत के प्राणियों की पुकार को शीघ्र सुनते हैं। इस अनंत कोटि ब्रह्मांड में जिनते भी मंत्र पाए जाते हैं, सभी मंत्रों के निर्माणकर्ता भगवान सदाशिव हैं। कार्यक्रम के संयोजक अमरदास महराज ने कहा कि हिंदू धर्म संरक्षण के क्षेत्र में सुख शांति की स्थापना कार्यक्रम का उद्देश्य है। इस मौके पर शशिकांत शुक्ला, लालधर तिवारी, सुभाष चंद्र दूबे, आनंद तिवारी आदि मौजूद रहे।