वाराणसी। काशी में अपने पूर्वजों के पैतृक आवास बचाने के साथ-साथ विशेश्वर पहाड़ी की रक्षा के लिए स्थानीय लोगों ने महाशिवरात्रि को काला दिवस के रूप में मनाया। मंगलवार को विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर योजना का विरोध कर रहे काशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र के निवासियों और दुकानदारों ने काले झंडे लगाकर अपना विरोध जताया।
मंदिर परिक्षेत्र में बसे मोहल्लों के 273 भवनों को तोड़ कर काशी विश्वनाथ को गंगा दर्शन कराने की योजना के विरोध में क्षेत्रीय नागरिकों ने काला दिवस मनाने का निर्णय पूर्व में किया था। इसके चलते विश्वनाथ मंदिर, नीलकंठ, लाहौरी टोला, ब्रह्मनाल और नेपाली खपड़ा मोहल्लों में क्षेत्रीय नागरिकों ने अपने-अपने घरों और दुकानों पर सोमवार शाम को ही काला झंडा लगा दिया था। काले झंडे लगते ही पुलिस और प्रशासन के हाथ-पांव फूलने लगे। पुलिस व नागरिकों में काला झंडा लगाने को लेकर कुछ जगह नोकझोंक भी हुई।
योजना का विरोध करने वाले वरिष्ठ पत्रकार पदमपति शर्मा ने कहा कि पीएम मोदी द्वारा काशी की पौराणिक धरोहर से छेड़छाड़ नहीं करने के निर्देश के बावजूद उनकी सरकार काशी के अस्तित्व को मिटाने पर आमादा है। इस दौरान कृष्ण कुमार शर्मा, पूर्व पार्षद दिलीप यादव, तीर्थ पुरोहित महासभा के सदर कन्हैया त्रिपाठी, वरिष्ठ पत्रकार शशिधर इस्सर, राजनाथ तिवारी, राजकपूर, सुनील मेहरोत्रा, राजेंद्र तिवारी, बबलू महंत, राजू साव और विनय चौधरी आदि ने शपथ ली कि हम अपने पुरखों के बनाए भवनों और विरासत को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे।
स्नेहा तिवारी, सीओ दशाश्वमेध ने बताया कि मकानों-दुकानों पर काले झंडे लगाने की सूचना पर पुलिस मौके पर गई थी। पूछताछ में लोगों ने बताया कि वे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रकट कर रहे हैं।