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केदारेश्वर से कर्दमेश्वर तक उमड़े श्रद्धालु

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वाराणसी। देवों के देव महादेव की नगरी काशी में महाशिवरात्रि पर कोना-कोना आस्था और उल्लास से भर उठा। बाबा विश्वनाथ के साथ ही काशी के अन्य शिवालयों में दर्शन-पूजन और जलाभिषेक के लिए सुबह से लगा श्रद्धालुओं का तांता देर शाम तक नहीं थमा। महामृत्युंजय, गौरी केदारेश्वर, तिलभांडेश्वर, जागेश्वर महादेव, बीएचयू विश्वनाथ मंदिर, शूलटंकेश्वर सहित अन्य प्रमुख शिवालयों में हजारों श्रद्धालुओं ने हाजिरी लगाई। सविधि दर्शन-पूजन और जलाभिषेक किया। भव्य शृंगार-पूजन के साथ जगह-जगह बाबा के विवाहोत्सव की भी धूम मची।
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मंगलवार को शहर के सभी शिवालयों में आस्था और उल्लास का यह नजारा एक जैसा था। जागेश्वर महादेव मंदिर में शृंगार महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। स्वामी मधुर कृष्ण ने बताया कि शाम को पार्थिवेश्वर शिवपूजन के बाद रात्रि जागरण और भजन संध्या में सुमधुर भक्ति गीतों की रसधार बही। पंडित उमाशंकर के आचार्यत्व में असंख्य पार्थिवेश्वर शिवपूजन किया गया। कर्दमेश्वर महादेव मंदिर में भी भक्तों का तांता लगा रहा। पुजारी अमरनाथ गिरी ने बताया कि मंगला आरती के पश्चात पट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। केदारघाट स्थित गौरी के दारेश्वर, घूष्मेश्वर महादेव, बैजनत्था, गौतमेश्वर, ऋणमुक्तेश्वर, रामेश्वर, पातालेश्वर आदि शिवालयों में आस्थावानों ने विधिविधान से जलाभिषेक किया। श्री काशी विश्वनाथ की ससुराल सारंगनाथ महादेव परिसर में मेले जैसा नजारा रहा। बीएचयू विश्वनाथ मंदिर में भी श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगीं। पूरा शहर ही शिव की भक्ति में लीन रहा। शैव मतावलंबियों ने व्रत रखा और घरों में ही बाबा की सविधि आराधना की। दूध, शहद, शक्कर, गंगा जल से स्नान कराने के बाद बिल्व पत्र और मदार की माला, धतूरा आदि अर्पित किया। सभी शिवालयों को अशोक, कामिनी के पत्तों और सुगंधित पुष्पों से सजाया गया था। कहीं जागरण तो कहीं विविध अनुष्ठान आयोजित किए गए। श्री सर्वेश्वरी समूह अवधूत भगवान राम कुष्ठ सेवा आश्रम में संभव राम के सानिध्य में महाशिवरात्रि का पर्व मनाया गया। स्वंयसेवी संस्थाओं की ओर से जगह-जगह खाने पीने का स्टाल और चिकित्सा शिविर लगाया गया था।
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