वाराणसी। जिला कारागार में दो अप्रैल, 2016 को बंदियों ने जेल अधीक्षक को बंधक बनाकर साढ़े सात घंटे तक हिंसक उपद्रव किया था। 747 बंदियों की क्षमता वाले जिला जेल में शनिवार को 1920 बंदी कैद थे। जिनमें से नक्सल प्रभावित चंदौली जिले के बंदी और गुड्डू मामा जैसे पूर्वांचल के खतरनाक शॉर्प शूटर भी शामिल हैं। पूर्वांचल की ऐसी संवेदनशील जेल पिछले छह महीने से बगैर कारागार अधीक्षक के ही चल रही है। वहीं, बंदीरक्षकों सहित अन्य स्टाफ की भी जिला जेल में भारी कमी है। इन हालात में सहज जायजा लगाया जा सकता है कि जिला जेल की मौजूद स्थिति कैसी है।
जिला जेल में वर्ष 2016 में हुए बवाल के दौरान फूंके गए सीसीटीवी कैमरे आज तक दुरुस्त नहीं किए जा सके हैं और शोपीस बने हुए हैं। यहां लगे जैमर सिर्फ 2-जी मोबाइल की बातचीत पर ही अंकुश लगाने तक सीमित है। इसके चलते बंदीरक्षकों और जेल अधिकारियों की मिलीभगत से बंदी 3-जी और 4-जी मोबाइल से बातचीत करते हैं। जैमर को अपडेट करने का प्रस्ताव कारागार प्रशासन की ओर से भेजा गया लेकिन शासन स्तर से इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई। वहीं, 747 बंदियों की क्षमता के अनुसार जेल में 80 बंदीरक्षक होने चाहिए लेकिन सिर्फ 67 तैनात हैं। डिप्टी जेलर के छह में से दो पद खाली हैं। इस संबंध में जिला जेल के प्रभारी अधीक्षक अंबरीष गौड़ ने कहा कि सीसीटीवी, जैमर और कर्मचारियों के खाली पदों के संबंध में आला अधिकारियों को जानकारी भेजी गई है। इन सभी के संबंध में शासन स्तर से ही निर्णय होना है।