वाराणसी। प्रदूषण की रोकथाम के लिए दावे चाहे जो किए जाएं लेकिन कहीं कोई अतिरिक्त तत्परता छोड़िए, निर्धारित प्रावधानों की भी खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। शासन से लेकर स्थानीय परिवहन महकमा तक हर स्तर पर किस कदर उदासीनता बरती जा रही है, उसकी एक बानगी देखिए। प्रदूषण नियंत्रण के लिए शासन से जोन स्तर पर एक एआरटीओ टेक्निकल का पद सृजित किया है लेकिन वाराणसी में दस साल बाद भी तैनाती नहीं की जा सकी है और यह पद खाली पड़ा है। जबकि, प्रदूषण नियंत्रण के निर्धारित प्रावधानों का अनुपालन कराने के साथ ही इससे जुड़ी जांच और तकनीकी कार्यों की जिम्मेदारियाें के लिए एआरटीओ टेक्निकल की तैनाती लखनऊ समेत कुछ अन्य जोनों में काफी पहले से है। और तो और प्रदूषण मापने के लिए जांच किट से युक्त जो वाहन यहां तीन साल पहले उपलब्ध कराया गया, वह अफसरों के सैर के काम आ रही है।
प्रदूषण मापने वाली जांच किट से युक्त यह बोलेरो गाड़ी एआरटीओ टेक्निकल के लिए ही मुहैया कराई गई है। वाहनों के प्रदूषण की जांच के नाम पर फिलहाल प्रमाणपत्र चेक करने के सिवा परिवहन और ट्रैफिक पुलिस की ओर से कुछ नहीं किया जाता। जबकि, जांच किट युक्त वाहन इसलिए मुहैया कराया गया है कि सड़कों पर गुजर रहे वाहनों की मौके पर ही प्रदूषण जांच की जा सके। जिनके पास प्रदूषण जांच का प्रमाणपत्र है, उनके वाहन को भी क्रास चेक किया जा सके लेकिन प्रदूषण की बढ़ती चुनौतियों के बावजूद जिम्मेदारों की ओर से अब तक इसके लिए कोई ठोस पहल नहीं की जा सकी है। इन बेपरवाहियों के चलते वाराणसी की गिनती टॉप टेन प्रदूषित शहरों में होने लगी है।
दिल्ली, लखनऊ से लेकर कानपुर तक के शहरों में प्रदूषण कम करने के उपाय किए जा रहे हैं लेकिन वाराणसी में इसकी कोई पहल नहीं की जा रही है। जबकि, शासन ने जोन स्तर पर एक एआरटीओ टेकिभनकल का पद सृजित करने के साथ ही जरूरी संसाधन भी मुहैया कराए लेकिन फिर न शासन ने इस ओर गंभीरता दिखाई न ही विभागीय उच्चाधिकारियों ने। परिवहन विभाग के सूत्रों की मानें तो एआरटीओ टेकिभनकल के लिए मुहैया कराई गई जांच किट लगी बोलेरो से फिलहाल परिवहन विभाग के एक अधिकारी चलते हैं। बोलेरो में लगी प्रदूषण जांच किट शोपीस बनी है।