वाराणसी। तीन दिवसीय शारदीय नवरात्र महोत्सव महासप्तमी के दिन बुधवार से आरंभ होगा। लेकिन काशी में सात पूजा पंडालों में पहले दिन ही प्रतिमाएं प्रतिष्ठापित हो जाएंगी। देर रात बाजेगाजे , जयकारे के साथ प्रतिमाएं पंडालों में पहुंचा दी गईं। प्राण-प्रतिष्ठा के साथ ही गुरुवार की सुबह इन प्रतिमाओं के कपाट खोल दिए जाएंगे। इसी के साथ झांकी दर्शन आरंभ हो जाएगा।
शहर के गायघाट स्थित शारदा विद्या मंदिर दुर्गोत्सव समिति के पंडाल में गुरुवार को मां दुर्गा की प्रतिमा प्रतिष्ठापित की जाएगी। समिति के अध्यक्ष जीएन सिंह ने बताया कि उनकी पूजा समिति की ओर से 45 वर्षों से नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना के साथ ही मां दुर्गा की प्रतिमा प्रतिष्ठापित की जाती है। नौ दिनों तक ब्राम्हणों के द्वारा दुर्गा पाठ और नृत्य. संगीत एवं मां के पचरा का आयोजन किया जाएगा। 30 सितंबर को कन्या पूजन के बाद प्रसाद वितरण कर मां दुर्गा की मूर्ती खिड़किया घाट पर स्थित गंगा सरोवर में विसर्जित कर दिया जायेगा।
इसी तरह टाउनहाल में सार्वजनिक दुर्गोउत्सव समिति की ओर से कलश स्थापना की जाएगी। पंडाल सजा दिया गया है। ट्रस्ट के अध्यक्ष गोविंद भार्गव ने बताया कि नौ दिनों तक मां का विधि- विधान से पूजन किया जाएगा। अष्टमी और नवमी तिथियों को देवी जागरण होगा। सुड़िया स्थित एसबी दुर्गोउत्सव समिति के पंडाल में देर शाम प्रतिमा बाजे गाजे के साथ लाई गई। पंडाल में मां वैष्णो दर्शन यात्रा की झांकी के दर्शन होंगे। इसी तरह श्री दुर्गा पूजन उत्सव समिति दारानगर के पंडाल में भी देर रात प्रतिमा पहुंचाई गई। नवरात्र के पहले दिन मां भगवती का हवन पूजन कर मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। श्रद्धालुओं के दर्शन- पूजन के लिए मां का चेहरा खोल दिया जाएगा। नवापुरा में भी भव्य सजे पंडाल में गुरुवार की सुबह मां दुर्गा की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा होगी। दशमी के दिन धूमधाम से दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन खिड़कियां घाट स्थित गंगा सरोवर में किया जाएगा।