जौनपुर। रमजान के तीसरे अशरे में एतेकाफ के लिए रोजेदार मस्जिदों में मगरिब की नमाज में पहुंच गए। अब वह दस दिनों तक यहां रहकर अल्लाह की इबादत में मशगूल रहेंगे। ईद का चांद देखकर वह अपने घरों को रवाना होंगे। उधर, शुक्रवार को जुमे की नमाज में मस्जिदें नमाजियों से भरी रहीं। इस दौरान पेश इमामों ने तीसरे अशरे और एतेकाफ के बारे में तकरीर की और नमाज के बाद मुल्क की तरक्की और खुशहाली के लिए दुआएं मांगी।
रमजान के दो अशरे पहला रहमत और दूसरा मगफिरत का खत्म हो गया। अब तीसरा और आखिरी अशरा जहन्नम से आजादी का शुरू हुआ है। आखिरी अशरे में रोज़ेदार अल्लाह की इबादत और गुनाहों से तौबा कर जहन्नम की आग से छुटकारा हासिल करते हैं। इस अशरे में रोज़ेदार मस्जिदों में एतेकाफ की नीयत से ठहर कर इबादत करते हैं । खेतासराय के मदरसा अहले सुन्नत एजाजुल उलूम के मौलाना शकील अहमद चिश्ती ने बताया की एतेकाफ लिए जरूरी है की सूरज डूबने से पहले मस्जिद में दाखिल हो और और 29 या 30 रोज़े को चाँद निकलने की तसदीक़ होने पर मस्जिद से बाहर निकले । मौलाना चिश्ती बताते है की इसी अशरे में एक रात ऐसी है जिसकी इबादत हज़ार रातो की इबादत से बढ़कर है । इसे लैलतुल कद्र की रात कहा जाता है ।इस रात के इबादत की फ़ज़ीलत क़ुरआन में भी बयान की गई है ।हदीस शरीफ में है की इस रात को आखिरी रमज़ान के आखिरी अशरे की ताक़ रातो में तलाश किया जाता है। जो शुक्रवार की रात से शुरू हो गई। अब यह रातें रमजान की 23, 25, 27 और 29 को मिलेगी।
उधर, शुक्रवार को जुमे की नमाज में मस्जिदें नमाजियों से भरी रहीं। पेश इमामों ने रमजान के आखिरी आशरे और एतेकाफ पर रोशनी डाली। नमाज के बाद मुल्क की तरक्की और खुशहाली के लिए दुआएं मांगी गईं।