वाराणसी। सांस्कृतिक अध्ययन एवं शोध केंद्र ज्ञान प्रवाह और पट्टाभिरामशास्त्री वेद मीमांसा अनुसंधान केंद्र वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय प्रतिष्ठान की ओर से ज्ञान-प्रवाह सभागार में वेदों पांग मध्य मीमांसा शास्त्र विषय पर त्रिदिवसीय अखिल भारतीय वेद संगोष्ठी का उद्घाटन सोमवार को किया गया।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के प्रो. आचार्य कमलेश दत्त त्रिपाठी ने कहा कि वैदिक रूपक में कल्पित वेद-पुरुष के उपांग रूप में मीमांसा वेद के नि:सृष्टार्थ का प्रकाश करता है। उन्होंने कहा कि वेदांत का विचार करने पर तीन तत्व निष्कर्ष रूप में कर्म, उपासना, और ज्ञान सामने आते हैं। मुख्य अतिथि के रूप में सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. गोपबंधु मिश्र ने कहा कि उपासना भक्तिमार्ग का मूल है। उन्होंने उपासना एवं उपनिषद शब्दों के आशय पर प्रकाश डालते हुए स्पष्ट किया कि उपासना की प्रतिपत्ति भी ज्ञान में होती है। संचालन लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ के वेद विभागाध्यक्ष प्रो. गोपाल प्रसाद शर्मा ने और स्वागत ज्ञान प्रवाह के आचार्य प्रो. युगल किशोर मिश्र ने स्वागत किया। इस अवसर पर संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजारामशुक्ल, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. श्रीकिशोर मिश्र, प्रो. गंगाधर पंडा, प्रो. आनंद कुमार श्रीवास्तव, डॉ. गंगाधर मिश्र, नंदलाल बाजोरिया आदि मौजूद रहे।