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मर्स्क लाइन आज रामनगर से हल्दिया भेजेगी 16 कंटेनर

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वाराणसी। विश्व की सबसे बड़ी कंटेनर शिपिंग कंपनी मर्स्क लाइन गंगा में वाराणसी से हल्दिया के बीच शुरू जल परिवहन से स्थायी तौर पर जुड़ सकती है। मर्स्क मंगलवार को हल्दिया के लिए 16 कंटेनर भेजेगी। कंटेनर कंपनी पहली बार गंगा नदी (राष्ट्रीय जलमार्ग एक) का प्रयोग करने जा रही है।
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12 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी के रामनगर में गंगा नदी (राष्ट्रीय जलमार्ग एक) पर भारत का पहला मल्टीमोडल टर्मिनल राष्ट्र को समर्पित किया था। उसी दिन उन्होंने गंगा नदी पर कोलकाता से वाराणसी पहुंचे देश के पहले कंटेनर कार्गो भी रिसीव किया था। केंद्रीय पोत परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने अगस्त, 2016 में हल्दिया से वाराणसी तक मारुति कार की एक खेप को हरी झंडी दिखाई थी। तब से राष्ट्रीय जलमार्गों के कई खंडों पर 15 प्रायोगिक आवाजाही पूरी हो चुकी हैं।
दुनिया भर में मर्स्क के सालाना 12 मिलियन कंटेनर चलते हैं। कंपनी पहली बार भारत में अंतर्देशीय जलमार्गों का इस्तेमाल कर रही है। गंगा नदी पर मर्स्क के कंटेनर उसी प्रकार आएंगे-जाएंगे, जिस प्रकार पेप्सिको, इमामी एग्रोटेक, इफको फर्टिलाइजर, डाबर इंडिया के कंटेनर भेजे या मंगाए जाते हैं। मर्स्क के अंतर्देशीय जलमार्ग से जुड़ जाने से आंतरिक इलाकों से सीधे बांग्लादेश तक और बंगाल की खाड़ी से होते हुए अन्य देशों तक कार्गो की आवाजाही हो सकेगी।
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विशेषज्ञ मर्स्क के भारत में अंतर्देशीय जल परिवहन से जुड़ने को एक उपलब्धि और बड़ी संभावना के रूप में देख रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि कंटेनर कार्गो परिवहन में हैंडलिंग लागत कम होती है, मॉडल शिफ्ट आसान होता है। चोरी और क्षति कम होती है। कार्गो मालिक अपने कार्बन फुट प्रिंट को भी कम कर सकते हैं।
विश्व बैंक की तकनीकी और वित्तीय सहायता से केंद्र सरकार हल्दिया से वाराणसी (1390 किलोमीटर) तक 5369 करोड़ रुपये से जल मार्ग विकास परियोजना (जेएमवीपी) के तहत राष्ट्रीय जलमार्ग एक (गंगा नदी) को विकसित कर रही है।
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