वाराणसी। ‘परे भूमि नहिं उठत उठाए। बर करि कृपासिंधु उर लाए। स्यामल गात रोम भए ठाढ़े। नव राजीव नयन जल बाढ़े। छन महिं सबहि मिले भगवाना। उमा मरम यह काहुं न जाना। एहि बिधि सबहि सुखी करि रामा। आगें चले सील गुन धामा।’
काशी की 476 साल पुरानी चित्रकूट की रामलीला में नाटी इमली के भरत मिलाप की परंपरा शनिवार को अश्विनी शुक्ल एकादशी की गोधूलि बेला में संपन्न हुई। परंपरा अनुसार भगवान के स्वरूपों के दर्शन-पूजन काशिराज परिवार के अनंत नारायण सिंह ने किए, वहीं अद्भुत और अलौकिक छटा निहारने के लिए लाखों श्रद्धालु पहुुंचे। चारों भाइयों का मिलन देख लोगों ने भगवान राम और बाबा भोलेनाथ के जयकारे लगाए। भरत मिलाप के साक्षी बनने के लिए क्या छत, गली, सड़क हर ओर श्रद्धालुओं का रेला उमड़ा था। विदेशियों समेत सभी श्रद्धालुओं ने इस पल को अपने-अपने कैमरों में कैद किया।
14 वर्ष के वनवास के दौरान दशानन का बध करने के बाद भगवान राम अयोध्या लौटते हैं। पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ पुष्पक विमान पर सवार होकर मर्यादा पुरुषोत्तम राम दोपहर बाद पौने चार बजे मिलाप मैदान पर पहुंचे। पवनसुत ने प्रभु के आने की सूचना अयोध्या में भरत और शत्रुघ्न को दे दी। सूचना मिलने पर दोनों अनुज राम लीला मैदान बड़ा गणेश से नंगे पांव दौड़ते हुए भरत मिलाप मैदान पर पहुंचे। वहां पहुंचने के बाद भगवान को देख दोनों भाई साष्टांग प्रणाम करते हैं। भरत के प्रण के अनुसार अगर सूर्यास्त से पहले अग्रज भ्राता नहीं मिले तो मैं प्राण त्याग दूंगा। इसको देखते हुए भगवान भी सूर्यास्त से पहले अपने अनुज से मिलने के लिए पहुंच जाते हैं।
काशिराज परिवार के अनंत नारायण सिंह ने प्रभु राम, भाई लक्ष्मण और माता सीता के पुष्पक विमान की परिक्रमा की और कर लिफाफे में नेग दिया। इस दौरान लीला स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं ने एक सुर में जयघोष किया। थोड़ी देर के लिए लगा मानो मैदान में मौजूद हर व्यक्ति वास्तव में अयोध्या पहुंच गया हो।
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यदुवंशियों ने पुष्पक विमान को कंधे पर उठाया
एक ओर लीला हो रही थी पीछे मंच पर मानस मंडल के प्रेमी चौपाइयों का पाठ कर रहे थे। आयोजकों द्वारा राम दरबार की आरती उतारी गई। इसके बाद 476 साल की परंपरा के अनुसार भरत मिलाप से पहले यदुवंशियों ने पुष्पक विमान को कंधे पर उठाया। पूरे राम दरबार को लेकर अयोध्या के लिए चल पड़े। पुष्पक विमान के आगे-आगे सुरक्षाकर्मियों के अलावा डमरू दल, जिसमें 51 लोग शामिल थे, जो डमरू बजाते हुए चल रहे थे। डमरू दल नेे पूरे वातावरण राममय कर दिया।
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आकाशवाणी से सुनाया गया आंखों देखा हाल
भरत मिलाप की लीला की शुरुआत 3:45 से 5:05 बजे समाप्त हुई। इसका आंखों देखा हाल आकाशवाणी के वाराणसी और इलाहाबाद केंद्र से प्रसारित किया गया। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के महामना मदन मोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. राम मोहन पाठक ने लीला की परंपरा, इतिहास, उसके आध्यात्मिक-सांस्कृतिक पक्ष के साथ-साथ जन सहभागिता के पक्ष पर प्रकाश डाला। लीला स्थल पर दो जगह से आंखों देखा हाल सुनाया जा रहा था। मुख्य लीला स्थल से जहां डॉ. पाठक के साथ अरुण कुमार और डॉ. शिव कुमार मिश्र ने लीला का वर्णन किया, वहीं ईश्वरगंगी के पास आकाशवाणी के पांडुरंग पौराणिक ने इस सिलसिले को जारी रखा।