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बाबा की चार घंटे पहले होगी आरती

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वाराणसी। महाशिवरात्रि पर शिव विवाह के बाद काशी पुराधिपति के गौना की तैयारियां जोरों पर शुरू हो गई है। 26 फरवरी रंगभरी एकादशी के दिन बाबा विश्वनाथ मां पार्वती का गौना ले जाएंगे। इस दिन उनकी सप्तर्षि आरती तय समय से चार घंटे पहले होगी जबकि भोग आरती तय समय से साढ़े चार घंटे पहले लगाया जाएगा। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह ने बताया कि रंगभरी एकादशी के दिन सप्तर्षि आरती शाम को सात बजे के स्थान पर दिन में तीन बजे होगी, वहीं भोग आरती रात साढ़े नौ बजे की जगह शाम पांच बजे संपन्न होगी। इसके बाद रात 11 बजे तक मंदिर दर्शन के लिए खुला रहेगा।
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गौना रस्म के लिए मंहत डॉ कुलपति तिवारी के आवास पर बुधवार को रजत पालकी एंव मंदिर में लगने वाले रजत सिंहासन की सफाई और मरम्मत का कार्य शुरु हो गया। लोकमान्यताओं के अनुसार भगवान शंकर महाशिवरात्रि पर विवाह के बाद अमला (रगंभरी) एकादशी पर मां पार्वती को विदा कराकर कैलाश पर आए थे। रंगभरी एकादशी पर बाबा विश्वनाथ माता पार्वती और पुत्र गणेश की रजत प्रतिमाओं को राजसी स्वरुप में रजत पालकी में विराजमान कर काशीवासी गौना की रस्म निभाते है। इस अवसर पर मंहत आवास पर पालकी निकलने के पूर्व रजत प्रतिमाओं का विशेष पूजन कर अबीर गुलाल अर्पित कर होली खेलते है। इसी के साथ काशी में होली की शुरुआत हो जाती है।
विश्वनाथ मंदिर के महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया 350 वर्षों से लगातार वर्ष में सिर्फ एक बार ही रंगभरी एकादशी पर महंत आवास पर बाबा विश्वनाथ, मां पार्वती एवं गणेश की चल रजत प्रतिमाओं के राजसी स्वरुप एवं पालकी का दर्शन श्रद्धालुओं को होता है। इस दिन बाबा विश्वनाथ स्वयं भक्तों के साथ जमकर होली खेलते है। सांयकाल भक्त बाबा की चल प्रतिमा की पालकी में शोभायात्रा निकालते है जो महंत आवास से मंदिर तक जाती है। उस दिन रजत प्रतिमाओं को मंदिर के गर्भगृह में स्थापित कर अबीर गुलाल अर्पित कर होली खेलने के बाद विशेष सप्तऋषि आरती की जाती है।
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