सीतामढ़ी। महाशिवरात्रि से पतित पावनी गंगा के तट पर सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग का निर्माण और महाअनुष्ठान के साथ ही श्री सीताराम महायज्ञ और श्रीरामकथा के भव्य आयोजन में रविवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। आस्था और श्रद्धा की उमंगों के बीच श्रीरामकथा सुुनाते हुए स्वामी बृजेशानंद जी महाराज ने भगवान के प्रताप का बखान किया। कहा कि पत्थर बन चुकी गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या का उद्धार कर प्रभु ने उन्हें शाप से मुक्ति दिलाई, जिसके बाद वह अपने पतिलोक पधार गईं। उन्होंने श्रीराम के राजा जनक से परिचय और सीता स्वयंवर का वर्णन कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। उन्होंने श्रीराम के तीनों भाइयों के विवाह का प्रसंग सुनाया, जिस पर पूरा वातावरण विवाहोत्सव सरीखा लगने लगा। कहा कि चारों भाइयों का विवाह भव्य रूप से हुआ। विवाह के दौरान शिवधनुष भंग होने की जानकारी पर सभा में पहुंचे भगवान परशुराम और श्रीराम के बीच हुए संवादों और प्रसंगों पर प्रकाश डालते हुए कथावाचक ने बताया कि परशुरामजी के कहने पर जब भगवान श्रीराम ने वैष्णव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाई तो उन्हें श्रीराम के नारायण स्वरूप का बोध हुआ। राजा जनक की पुत्रियों की विदाई का प्रसंग सुनाकर भक्तों को पिता-पुत्री के स्नेहपूर्ण संबंधों का बोध कराया। साथ ही भगवान श्रीराम के राजतिलक का निर्णय, कैकेयी का कोप और राम वनगमन की कथा का भी भावपूर्ण वर्णन किया। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे।