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न वेंटिलेटर न आईसीयू, ये कैसा ट्रॉमा सेंटर

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वाराणसी। दीनदयाल उपाध्याय राजकीय अस्पताल के निरीक्षण पर पहुंचे प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने खामियों पर जिम्मेदारों को कड़ी फटकार लगाई। अस्पताल के नवनिर्मित ट्रॉमा सेंटर में उस अनुरूप सुविधा और संसाधन उपलब्ध न होने पर निर्देश दिया कि इसे इमरजेंसी के रूप में चलाएं। कहा कि जब ट्रॉमा सेंटर जैसी सुविधाएं यहां उपलब्ध ही नहीं हैं तो इसे ट्रॉमा सेंटर नाम कैसे दे दिया गया। निजी प्रैक्टिस करने और बाहर से दवा लिखने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी। साफ-सफाई और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने की ताकीद विभागीय उच्चाधिकारियों को की। मंत्री ने बताया कि अब तक आठ ऐसे चिकित्सकों को चिह्नित किया गया है।
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दीनदयाल अस्पताल के इस ट्रॉमा सेंटर का निर्माण पूर्ववर्ती सपा सरकार में कराया गया था। नई बिल्डिंग बनने के बाद उद्घाटन तो हो गया लेकिन ट्रॉमा सेंटर पर चौबीस घंटे चिकित्सा के लिहाज से न डॉक्टरों की तैनाती की गई न जरूरी संसाधन मुहैया कराए गए। न वेंटिलेटर उपलब्ध न आईसीयू। दो दिवसीय बनारस दौरे के अंतिम दिन स्वास्थ्य मंत्री ने दीनदयाल अस्पताल के ट्रामा सेंटर, निर्माणाधीन महिला अस्पताल, आशा ज्योति केंद्र के निरीक्षण के अलावा वार्ड में भर्ती मरीजों से बातचीत कर स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी की। विधायक अवधेश सिंह की शिकायत पर 27 करोड़ की लागत से बन रहे महिला अस्पताल के निर्माण का जायजा लेने पहुंचे। यहां निर्माण की गति धीमी और गुणवत्तायुक्त काम न होने पर कार्यदायी संस्था के अधिकारियों को लखनऊ तलब किया।
ई हॉस्पिटल के बारे में नोडल आफिसर डॉ. आशीष गुप्ता से जानकारी मांगी, जिसमें पता चला कि अब तक 834 पंजीकरण हो चुके हैं। इस दौरान रैन बसेरा भी देखा। यहां सुविधाएं बढ़ाकर इसे आरामगृह के रूप में विकसित करने की ताकीद की। मॉडयूलर ओटी बनाने के प्रस्ताव पर जल्द कार्रवाई, छह बेड का आईसीयू खोले जाने, नई मशीनें सहित इससे संबंधित नियुक्तियां जल्द करने की बात कही। बताया कि अस्पताल को अपग्रेड करने के लिए एमआरआई, सीटी स्केन मशीन, डायलिसिस मशीन आदि के लिए धन स्वीकृत किया जा चुका है। सीएमओ डॉ. वीबी सिंह केो यहां लिफ्ट लगवाने के निर्देश दिए ताकि तीसरे तल पर मरीजों को आने-जाने में परेशानी न हो।
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