ज्ञानपुर। किसानों की गाढ़ी कमाई को पलभर में नष्ट कर रहे छुट्टा पशुओं के रोकथाम को लेकर पहल तेज हो गई है। चारागाह की खोज संग ‘शार्ट सीमन’ के सहारे रोक लगवाने की कवायद शुरू हो गई है। बाएएफ संस्था और शासन के बीच चल रही वार्ता के बाद विदेश से संबंधित सीमन मंगाया जाएगा। इससे गर्भाधान कराने वाली गाएं सिर्फ बछिया को ही जन्म देंगी।
कृषि प्रधान देश भारत में 90 फीसदी से अधिक खेती मानसून पर आधारित रहती है। मौसम के साथ न देने से 50 से 60 फीसदी तक पैदावार पर फर्क पड़ता है। गत दो सीजन से मानसून के धोखा देने से धान और गेहूं की फसल बेहतर पैदा नहीं हो सकी। इस बार तमाम मुश्किलें सहने के बाद किसानों ने गेहूं, मटर, चना आदि फसलों की बुआई की है लेकिन बड़ी संख्या में छुट्टा टहल रहे बछड़े पल भर में उसे नष्ट कर दे रहे हैं। इससे किसानों को काफी क्षति पहुंच रही है। शासन के सख्त रवैये से गाय के बछड़ो को कोई खरीद नहीं रहा है। पशुपालक चारा न होने से उन्हें छुट्टा ही छोड़ रहा है। किसानों का नुकसान होते देख पशुपालन एवं कृषि विभाग ने मामले को शासन स्तर तक पहुंचाया। इसके लिए जिले में चारागाह को खोजा जा रहा है साथ ही अब बछड़ो की कमी लोन के लिए गर्भाधान में ही नई तकनीकी अपनाने की पहल की जा रही है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरबी मौर्य ने कहा कि शासन और बाएएफ संस्था की वार्ता हो गई है। विदेश से ‘शार्ट सीमन’ मंगाकर गर्भाधान किया जाएगा। जिन गायों का यह सीमन लगेगा वह बछिया ही जनेंगी। कहा कि सीमन में वाई गुणसूत्र को ही गायब कर दिया जाएगा। सिर्फ एक्स गुणसूत्र होने से बछिया ही जनेंगी। शुरूआती दौर में यह सीमन प्रति डोज 1250 रुपए पड़ेेगा। भविष्य में पूणे में सीमन तैयार होने पर अधिकाधिक इसका प्रयोग किया जाएगा।