वाराणसी। द्वारिका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद को दोबारा ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य बनाए जाने पर भारत धर्म महामंडल में घमासान चरम पर पहुंच गया है। महामंडल के जनरल सेक्रेटरी शंभू उपाध्याय ने शनिवार की शाम डिपार्टमेंटल सेक्रेटरी की बैठक की कार्यवाही को गलत बताते हुए रिपोर्ट हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को भेज दी। उन्होंने चीफ जस्टिस को भेजे पत्र में कहा है कि 22 सितंबर को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के चयन के लिए दिए गए आदेश का अनुपालन कराने के लिए किसी पीठासीन जज या सेवानिवृत्त जज की नियुक्ति की जाए, ताकि निष्पक्ष तरीके से शंकराचार्य का चयन कराया जा सके।
देर शाम महामंडल के सभा कक्ष में जनरल सेक्रेटरी प्रो. शंभू उपाध्याय और चीफ सेक्रेटरी प्रो. प्यारे सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में शुक्रवार को हुई मंत्री सभा की बैठक को अस्तित्व विहीन और कपटपूर्ण बताया। जनरल सेक्रेटरी ने कहा कि इस बैठक के एजेंडे को कुछ लोगों ने नियम के विपरीत आगे बढ़ाया है। जबकि इसके एजेंडे को पहले ही महामंडल ने अवैध घोषित कर नोटिस जारी कर दिया था। इसके बाद भी जबरिया की गई बैठक मान्य नहीं हो सकती। उन्होंने बताया कि 36 सदस्यीय मंत्री सभा में से जो सदस्य उस बैठक में बुलाए गए थे उसमें दो पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। स्वरूपानंद को शंकराचार्य चुनने वाले धड़े को बहुमत नहीं मिल सका है। इस तरह का कदम उठाने वाले पदाधिकारियों को खामियाजा भुगतना होगा। शुक्रवार की शाम जहां डिपार्टमेंटल सेक्रेटरी की बुलाई गई मंत्री सभा में स्वरूपानंद को शंकराचार्य चुने जाने का फैसला लिया गया था, उसी भवन के सभा कक्ष में शनिवार की शाम जनरल सेक्रेटरी शंभू उपाध्याय ने शीर्ष पदाधिकारियों की मौजूदगी में इस प्रक्रिया को नियम के विपरीत और असंवैधानिक करार दिया गया। पदाधिकारियों का कहना था कि शंकराचार्य का चयन हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में नियमानुसार तीनों पीठों के शंकराचार्यों, विद्वानों के मार्गदर्शन के आधार पर किया जाएगा। सात दिसंबर को होने वाली मंत्री सभा की बैठक में इस पर निर्णय लिया जाएगा। इस मौके पर प्रो. श्रद्धानंद, राजेश राय, भाल शास्त्री, केपी वर्मा उपस्थित थे।देर शाम डिपार्टमेंटल सेक्रेटरी और उपाध्यक्ष की ओर से नियम विरुद्ध की गई मंत्री सभा की बैठक की रिपोर्ट हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजी गई।