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वाराणसीः मंडल स्तरीय जांच में फर्जी मिले 12 शिक्षकों को किया गया बर्खास्त, बीएसए ने दर्ज कराई एफआईआर 

Tue, 30 Jun 2020 12:05 AM IST
विचित्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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बेसिक शिक्षा विभाग में नियुक्त शिक्षकों और कर्मचारियों के शैक्षिक अभिलेखों की मंडल स्तरीय जांच पूरी होने के बाद सोमवार को उसकी रिपोर्ट आई। इसमें वाराणसी के पांच, चंदौली का एक, गाजीपुर के चार, जौनपुर के दो शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया। जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारियों द्वारा उन पर एफआईआर भी दर्ज कराई गई है।
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अनामिका शुक्ला मामला सामने आने के बाद 14 जून को जौनपुर व आजमगढ़ जिले में प्रीति यादव के नाम पर दो जगह नौकरी करने का मामला सामने आया था। इसके बाद प्रदेश सरकार ने परिषदीय विद्यालय के सभी शिक्षकों के अभिलेखों की जांच के आदेश दिए थे। वहीं परियोजना निदेशक ने द्वारा मंडल स्तरीय जांच कर रिपोर्ट भेजने का आदेश दिया था।

तभी से बेसिक शिक्षा विभाग के एडी बेसिक प्रवीण कुमार उपाध्याय द्वारा वाराणसी मंडल में आने वाले चार जिलों के शिक्षकों/ कर्मचारियों की जांच कराई गई। जांच के बाद शिक्षक कर्मचारियों के दस्तावेजों की रिपोर्ट एडी बेसिक द्वारा परियोजना निदेशक को 26 जून को भेजी गई थी। इसमें 12 शिक्षक ऐसे मिले हैं, जिन्होंने फर्जी प्रमाणपत्र के दम पर नियुक्ति प्राप्त की थी। इन शिक्षक-कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया है। 
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एसआईटी ने जारी की शिक्षकों की दूसरी लिस्ट

जिला, मंडल स्तरीय जांच के अलावा फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति मामले की जांच एसआईटी और एसटीएफ भी कर रही है। एसआईटी द्वारा एडी बेसिक प्रवीण कुमार उपाध्याय को शिक्षकों की एक नई सूची दी गई है, जिसे एडी बेसिक ने चारों जिलों के बीएसए को भेज दिया है।       

तीन जुलाई को होगी मंडलवार समीक्षा

प्रदेश में अनामिका शुक्ला फर्जी शिक्षक मामले के खुलासे के बाद से पूरे बेसिक शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, विभाग में फर्जीवाड़े की नई नई परतें खुल रही हैं। अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा रेणुका कुमार ने इस संबंध में सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।

29 जून से 4 जुलाई तक चलने वाली समीक्षा बैठक में तीन जुलाई को वाराणसी में बनी जांच कमेटी के साथ अधिकारियों की समीक्षा बैठक होगी। इसमें एसआईटी और एसटीएफ की जांच में फर्जी पाए गए शिक्षक पर कार्रवाई, कस्तूरबा गांधी विद्यालय में नियुक्त शिक्षकों का सत्यापन और कार्रवाई की समीक्षा होगी। साथ ही वेतन से जुड़े डाटा में गड़बड़ियों के आधार पर उठाए गए कदमों की समीक्षा भी होगी। इसमें एसडीएम, बीएसए, एडी बेसिक व लेखा अधिकारी मौजूद होंगे।

तलब किए गए पांच शिक्षकों ने रखा अपना पक्ष, एक फरार

सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
वाराणसी के छह शिक्षकों के पैन और आधार अन्य जनपदों में भी मिलने पर बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सभी को नोटिस भेजकर सोमवार को तलब किया था। इसके बाद पांच शिक्षकों सोमवार को बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर अपना स्पष्टीकरण दिया। वहीं चोलापुर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय मुरेरी में पढ़ाने वाले बलिया निवासी महात्मा यादव नहीं पहुंचे।

चोलापुर खंड शिक्षा अधिकारी जब जांच करने उनके घर पहुंचे तो वहां भी कोई जानकारी नहीं पाई। तीन शिक्षकों ने बताया कि जिन जनपदों में उनका पैन मिला है, वे लोग कभी उस जनपद में गए ही नहीं। लेकिन वर्तमान में उनके नाम पर कोई अन्य शिक्षक नौकरी कर रहा है।

वहीं दो शिक्षक ऐसे थे, जो अंतर्जनपदीय स्थानांतरण में यहां आए और पुराने जिले में उनका डाटा डिलीट नहीं किया गया। इन पांच शिक्षकों के मामले में बीएसए राकेश सिंह ने वित्त एवं लेखाधिकारी अनूप मिश्रा को जांच करने को कहा है। उन्होंने बताया कि पता लगाया जाएगा कि क्या इन शिक्षकों की जगह अन्य जनपदों में कोई वेतन उठा रहा है या नहीं।

प्राथमिक के बाद अब विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षकों की भी होगी जांच

Education Degree - फोटो : पेक्सेल्स

 प्राथमिक व कस्तूरबा विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति में गड़बड़ी के मामले उजागर होने के बाद शासन ने सख्ती शुरू कर दी है। प्राथमिक, माध्यमिक और इंटर के बाद अब जांच की आंच उच्च शिक्षा तक भी पहुंच गई है। शासन ने अब विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में नियुक्तियों की जांच का निर्णय लिया है। आदेश के अनुसार अब सभी स्तर के शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच की जाएगी।

वाराणसी जिलाधिकारी को जारी पत्र के अनुसार जनपदवार समिति का गठन करके सभी शिक्षकों की नियुक्ति की संपूर्ण जांच होगी। इसमें विश्वविद्यालय, राजकीय महाविद्यालय, अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में तैनात शिक्षक जांच की जद में आएंगे। इसमें शैक्षणिक अभिलेखों के सत्यापन, शिक्षकों के भौतिक सत्यापन के साथ ही उनके बैंक डिटेल की भी जानकारी की जांच की जाएगी।

इस जांच में यह भी देखा जाएगा कि कोई शिक्षक अन्य किसी शिक्षक के स्थान व नाम पर तो कार्यरत नहीं है। शासन के निर्णय से कुछ शिक्षकों में खलबली मची है। बात करें संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की तो अक्सर वहां से संबद्ध महाविद्यालयों में नियुक्तियों की शिकायतें मिलती रहती हैं। वहीं विश्वविद्यालय में तैनात कई शिक्षकों के केस भी न्यायालय में लंबित चल रहे हैं। शासन की ओर से कई बार इस बारे में जांच रिपोर्ट और पत्राचार भी किया जा चुका है। काशी विद्यापीठ से संबद्ध पांच जिलों में लगभग 315 महाविद्यालय हैं। वह सभी इस जांच के दायरे में आएंगे। 
 
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स्कूलों में नहीं लगेंगे कॉपी-किताब के स्टाल

books - फोटो : books
वाराणसी में सीबीएसई ओर आईसीएसई बोर्ड से संचालित होने वाले विद्यालयों में छात्रों की फीस, कॉपी किताब लेने आदि की शिकायतों को शासन ने गंभीरता से लिया है। विद्यालयों के प्रधानाचार्य और प्रबंधकों को 2019-20 में निर्धारित फीस लेने का निर्देश दिया है, साथ ही किसी तरह के फीस कॉपी किताब का कोई स्टाल भी नही लग सकेगा। शासन के आदेश के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. विजय प्रकाश सिंह ने आदेश भी जारी कर दिया है। 

प्रधानाचार्यों, प्रबंधको  को लिखे पत्र में विद्यालय परिसर में किसी भी तरीके का कॉपी किताब का स्टाल न लगाने, किसी निश्चित दुकान से ड्रेस पुस्तक और अन्य सामानों को खरीदने के लिए अभिभावकों को बाध्य ना करने के साथ ही प्रधानाचार्य को कर्मचारी और छात्रों के किसी भी समस्या का समाधान करने को कहा है। चेतावनी भी दी है इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी होगी।
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