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नारी मन की अजब कहानी है ‘मीता की कहानी’

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वाराणसी। स्त्री मन की परतें खोलता नाटक मीता की कहानी का मंचन नागरी नाटक मंडली के मंच पर कार्यक्रम के चौथे दिन बुधवार को किया गया। निर्देशक कविराज लईक ने बेहद सूझबूझ के साथ स्त्री समलैंगकिता के मुद्दे को मंच पर उकेरा। नाटक की मुख्य किरदार मीता का लालन-पालन लड़कों की तरह हुआ। लड़कों में पलने-बढ़ने के कारण उसकी जीवन शैली, व्यवहार और यौनिक प्राथमिकताएं मर्दों जैसी हो गई हैं। उसे लड़कों के बजाय लड़कियां आकर्षित करती हैं। पौने दो घंटे के नाटक मीता की कहानी ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।
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थिएटर ओलंपिक के मंच पर नाटककार विजय तेंदुलकर के नाटक मीता की कहानी में मीता को उसकी दोस्त नम: बहुत अच्छी लगती है। वह उसे प्यार करने लगती है। मीता का दोस्त बापू कई बार उसे समझाता है पर वह नहीं मानती। कहानी में नम: का दोस्त दलवी और पांडे भी अहम किरदार निभाते हैं। नाटक के अंत में मीता आत्हत्या कर लेती है। नाटक का सूत्रधार बापू उसकी आत्महत्या के लिए स्वयं को जिम्मेदार मानता है। युवा कलाकारों के दल में मीता का किरदार मैथिली देसाई ने और बापू का किरदार कविराज लईक ने बखूबी निभाया।
द परफार्मर्स उदयपुर के समूह के कलाकारों में प्रदीप गढ़वी, जयेश सिंधी, मीरा जोशी, प्रीतेश जाधव रहे। वेशभूषा अनुकंपा लईक , नृत्य-रचना शिप्रा चटर्जी, संगीत रवीन्द्र पुरी गोस्वामी, मंच सज्जा प्रीतेश जाधव, आकाश बैरवा, प्रकाश मयंक पंड्या, मोहसिन शेख, मंच-प्रबंध प्रबुद्ध पाण्डे और अनुवाद बसंत देव का रहा।
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