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जीवंत हुई श्रीकृष्ण के जन्म से राज्याभिषेक तक की गाथा0

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वाराणसी। श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर राज्याभिषेक तक की पूरी गाथा बेहद ही मनोरम ढंग से नृत्य में पिरोया गया। एक ही मंच पर मथुरा, ब्रज तक के दृश्य उभर आए थे। मथुरा का दृश्य जहां जेल में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, गोकुल जो कृष्ण की बाल लीलाओं का साक्षी बना, बरसाना जहां श्रीकृष्ण ने राधा संग रासलीला रचाई और द्वारका जहां उनका राज्याभिषेक हुआ। दीक्षा म्यूजिक एकेडमी के कलाकारों ने नृत्य नाटिका के जरिए इसका ऐसा सजीव मंचन किया कि यूं लगा जैसे साक्षात वो त्रेता युग में आ गए हों।
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मौका था भारत विकास परिषद द्वारा आयोजित ‘वसंतोत्सव : मोहे रंग दे सांवरिया’ कार्यक्रम का। ‘हमारी संस्कृति, हमारी धरोहर’ पर आधारित इस कार्यक्रम में एक साथ चार मंचों पर 50 सदस्यों की टीम ने बड़ी ही खूबसूरती से त्रेता युग को जीवंत किया। इसमें सभी की समन्वित मेहनत मंच पर एक लय ताल में परिलक्षित हो रही थी। इस प्रस्तुति के बाद सदस्यों ने अबीर गुलाल लगाकर एक दूसरे को रंगोत्सव की बधाइयां दीं। अध्यक्ष संजीव खेमका ने अतिथियों का स्वागत किया। कहा कि काशी शाखा की कोशिश रही है कि लुप्त होती संस्कृति व धरोहरों को मंच पर जीवंत किया जाए। यही वजह रही कि एनसीआर रीजन की ओर से नौ पुरस्कार काशी शाखा को मिले। इस अवसर पर ब्रह्मानंद पेशवानी, सुदीप टंडन, सुनील सिन्हा आदि मौजूद रहे। महिला संयोजिका नीलू मिश्रा ने प्रतिभागियाें को सम्मानित किया। धन्यवाद ज्ञापन मनीष अग्रवाल ने किया।
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