फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अपने ही जाल में उलझीं जांच एजेंसियां

विज्ञापन
विज्ञापन
वाराणसी। भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में बंद निलंबित एआरटीओ आरएस यादव की अरबों की संपत्ति के कागजात अब जांच एजेंसियों के ही गले की फांस बन गए हैं। इन कागजात को पूर्व में दायर किए गए आरोप पत्र में शामिल नहीं किया गया है। सूत्रों की मानें तो अब या तो दोबारा आरोप पत्र दायर किया जाएगा या फिर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का एक और मुकदमा दर्ज कर संपत्तियों का ब्यौरा उस मुकदमे में शामिल किया जाएगा। हालांकि ये दोनों ही प्रक्रिया पुलिस के लिए आसान नहीं होगी।
विज्ञापन

जांच एजेंसियों को आरएस यादव से जुड़ी संपत्तियों का जो ब्यौरा उपलब्ध कराया गया था, उसमें पंद्रह संपत्तियों की रजिस्ट्री के कागजात थे। पहले चंदौली पुलिस और बाद में विजिलेंस ने जांच की थी। सिंतबर में जो आरोप पत्र दाखिल किया गया, उसमें केवल दो संपत्तियों का उल्लेख किया गया। होटल वेस्ट इन, गोरखपुर स्थित मॉल, दिल्ली के फ्लैट, पहड़िया स्थित प्लाट समेत अन्य बेनामी कंपनियों का जिक्र ही नहीं किया गया। मुकदमे की केस डायरी से इसका खुलासा होने और ‘अमर उजाला’ में खबर छपने के बाद से जांच एजेंसियों में खलबली मची है। आरएस यादव की संपत्तियों के कागजात किस तरीके से मुकदमे में शामिल किए जाएं या फिर नया मुकदमा दर्ज किया जाए, इसे लेकर पूरे दिन चर्चा होती रही।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें