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जर्जर मकान ढहने से एक की मौत, तीन जख्मी

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वाराणसी। कोतवाली थाना अंतर्गत गायघाट क्षेत्र की लालसुर गली स्थित कैलाश सेठ के जर्जर हुए तीन मंजिला मकान का एक हिस्सा शनिवार की आधी रात बाद भरभराकर ढह गया। मकान में सोये कैलाश (64), उनकी पत्नी विद्या देवी (60), पौत्र राज सेठ (20) और गौतम सेठ (16) मलबे में दब गए। पूरे इलाके में अफरातफरी मच गई। पुलिस और एनडीआरएफ ने डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद मलबे में दबे परिवार को बाहर निकाला। गंभीर चोट लगने के कारण गौतम सेठ (16) की मौत हो गई जबकि विद्या देवी को बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। कैलाश और राज मंडलीय अस्पताल में भर्ती है। क्षतिग्रस्त मकान का बड़ा हिस्सा लटके होने से स्थानीय लोग उसके कभी भी ढहने की आशंका से दहशत में हैं। परिवार की माली हालत ठीक न होने से जर्जर मकान की मरम्मत नहीं हो पा रही थी।
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साड़ी की गद्दी पर काम करने वाले वाले कैलाश सेठ का परिवार शनिवार की रात सोया हुआ था। रात डेढ़ बजे के लगभग मकान का एक हिस्सा ढह गया। मकान ढहने की तेज आवाज से दूसरे हिस्से में सोए कैलाश के बड़े पौत्र शंकर सेठ की नींद खुली तो वह भागकर बाहर आया। परिवार के लोग मलबे में दबे थे। तब तक आसपास के लोग भी बाहर निकल आए। सूचना पर एनडीआरएफ के जवानों के साथ कोतवाली इंस्पेक्टर के साथ पहुंचे। लगभग डेढ़ घंटे की लंबी मशक्कत के बाद कैलाश, विद्या, राज और गौतम को बाहर निकाला गया। चारों को मंडलीय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने हाईस्कूल के छात्र गौतम को मृत घोषित कर दिया और विद्या की हालत गंभीर देख उन्हें बीएचयू ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। गौतम के पिता श्यामजी सेठ फेरी लगाते हैं। हादसे से पड़ोसी संतोष भारद्वाज के दो कमरों की दीवार भी चटक गई हैं।

तब और बड़ा हादसा होता
वाराणसी। मकान के जर्जर होने के नाते उसके ढहने की आशंका पहले से थी। पड़ोस के लोग भी मकान की मरम्मत न कराए जाने से चिंतित थे लेकिन माली हालत ठीक न होने से पीड़ित परिवार चाहकर भी मकान की मरम्मत नहीं करा पाया। बारिश से सीलन के चलते मकान का एक हिस्सा आखिरकार ढह गया। बाकी हिस्सा भी कब ढह जाए, कोई ठीक नहीं।
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घटना की रात परिवार के कुछ सदस्य कबीरचौरा अस्पताल में थे नहीं तो और बड़ा हादसा हो सकता था। हादसेे में जान गंवाने वाले गौतम सेठ की बहन अंजली के इलाज के सिलसिले में पिता श्यामजी और मां सीमा कबीरचौरा अस्पताल में रुके थे। मकान के मलबे के कारण पड़ोसी संतोष भारद्वाज के दो कमरे की दीवार भी चटक गई। संतोष ने अपने परिवार को दूसरे मकान में शिफ्ट किया है।
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