वाराणसी। फीस बढ़ोत्तरी और हर साल पंजीकरण में निजी विद्यालयों की मनमानी अब नहीं चलेगी। शिकायत मिलने पर अर्थदंड के साथ ही मान्यता निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। शनिवार को डीएम की अध्यक्षता में शुल्क नियामक अधिनियम पर हुई बैठक के दौरान फीस की निगरानी के लिए सात सदस्यीय कमेटी का गठन भी किया गया।
बैठक में निर्णय लिया गया कि पंजीकरण और फीस बढ़ोत्तरी में निजी विद्यालय को मनमानी नहीं करने दी जाएगी। सभी विद्यालयों को फीस और पंजीकरण शुल्क सार्वजनिक करना होगा। इसे विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर दर्ज करने के साथ ही नोटिस बोर्ड पर भी चस्पा करना होगा। सभी विद्यालयों को शिक्षा विभाग को लिखकर देना होगा कि वह कितना और किस मद में शुल्क ले रहे हैं। छात्रों और अभिभावकों से शिकायत मिलने पर पहली बार एक लाख रुपये अर्थदंड और फीस वापस करनी होगी। दूसरी बार शिकायत पर पांच लाख रुपये अर्थदंड और फीस वापसी करनी होगी और तीसरी बार शिकायत मिलने पर विद्यालय की मान्यता निरस्त कर दी जाएगी। यह यूपी बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएससी समेत सभी बोर्ड पर लागू होगा। डीएम की अध्यक्षता में इसके लिए सात सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। टीम में डीएम द्वारा नामित सीए, पीडब्ल्यूडी के अभियंता, वरिष्ठ कोषाधिकारी, डीआईओएस, प्रधानाचार्य और एक अभिभावक को शामिल किया गया है।