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‘घरवालों’ ने खूब किया सत्कार, मिला तिरस्कार

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वाराणसी। तीन दिवसीय आयोजन में मेहमानों के स्वागत के लिए शासन-प्रशासन ने भले ही पलक-पांवड़े बिछा दिए हों, घर के लोगों को तो सिर्फ अपमान और उपेक्षा ही मिली। बृहस्पतिवार को जब स्थानीय लोग दीनदयाल हस्तकला संकुल में कार्यक्रम स्थल और ऐढ़े गांव में 45 एकड़ में बनाए गए टेंट सिटी को देखने पहुंचे तो वहां उन्हें प्रवेश ही नहीं करने दिया गया। बड़ी उम्मीद से आए लोगों ने घंटों इंतजार किया और मायूस होकर लौट गए।
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सम्मेलन की घोषणा के बाद लोगों ने इसे ऐढ़े के लिए गौरव बताया था। देखते-देखते सड़कें चमक गईं। प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त हो गईं। दीवारों पर मनमोहक पेंटिंग बना दी गईं। खुशनुमा माहौल देखने वाले लोगों के मन में सवाल था कि क्या वे इसे नजदीक से देख पाएंगे? इसी दौरान प्रदेश की एनआरआई राज्यमंत्री स्वाति सिंह ने घोषणा की कि 24-25 जनवरी को कार्यक्रम स्थल और टेंट सिटी आम लोगों के लिए खोला जाएगा। इसके लिए विदेश मंत्रालय ने अनुमति दे दी है। कुछ ऐसी ही बात क्षेत्रीय विधायक रवींद्र जायसवाल ने भी कही थी।
बृहस्पतिवार को शहर के साथ-साथ गांवों और सारनाथ-बाबतपुर तक से सैकड़ों लोग परिवार के साथ कार्यक्रम स्थल और टेंट सिटी देखने के लिए सुबह-सुबह उमड़ पड़े। कार्यक्रम स्थल पहुंचने पर उन्हें निराशा हाथ लगी। मुख्य कार्यक्रम स्थल पर टेंट उखाड़े जा रहे थे। लकड़ी और प्लाइवुड से बनी दीवारें गिराई जा रहीं थी। उखड़ी फर्श पर कील-कांटे बिखरे थे।
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उधर, संकुल के गेट पर तैनात कर्मचारी बता रहे थे कि यह 27 जनवरी के बाद खुलेगा। यहां सफाई चल रही है। इससे निराश लोग टेंट सिटी पहुंचे तो उन्हें मुख्य द्वार तक भी नहीं जाने दिया गया। बताया जा रहा था कि अभी कुछ मेहमान टेंट में हैं, शाम को उनकी फ्लाइट है। यूपी कॉलेज और अग्रसेन कॉलेज की छात्राओं के ग्रुप को भी टेंट सिटी में नहीं जाने दिया गया। यूपी कॉलेज से आईं कृतिका, निहारिका, मेहनाज और सपना को निराशा हाथ लगी। सारनाथ से आईं सविता ने बताया कि बड़ी हसरत से टेंट सिटी देखने आए थे।
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