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न तो आदेश का असर हुआ, न नोटिस के बाद कार्रवाई

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वाराणसी। शहर में रोजाना लगने वाले जाम की वजह तीन विभाग हैं। एक नगर निगम जो मनचाही स्थानों पर दुकानें लगवा रहा है। दूसरा ट्रैफिक विभाग प्रतिदिन नए नियम बनाकर प्रयोग कर रहा है। तीसरा वीडीए, जिसे बड़े व्यावसायिक भवनों मे पार्किंग की जगह लगी दुकानें हटाने में दिलचस्पी ही नहीं है। माना जा रहा है कि अगर इन भवनों के बेसमेंट को खाली कराकर उसमें पार्किंग की व्यवस्था की जाए तो काफी हद तक समस्या का समाधान हो सकता है। दरअसल, वीडीए अधिकारी मौखिक आदेश देते हैं। इनका न तो पालन कराया जाता है और न ही कोई पालन करता है।
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शहर में चल रहे निजी अस्पतालों ने अपने नक्शे में बेसमेंट में पार्किंग दी है लेकिन सभी अस्पतालों में कहीं गोदाम बना दिया है तो कहीं उसमें ही अस्पताल चलाया जा रहा है। वाहनों की पार्किंग बाहर सड़क पर की जा रही है। वीडीए ने जांच कराई तो पता चला कि एक दर्जन ऐसे अस्पताल जिनके पार्किंग की जगह पर अन्य गतिविधियां संचालित हो रही हैं। नोटिस भी जारी कर दी लेकिन कार्रवाई अब तक नहीं हुई। दीपावली से पहले भी वीडीए वीसी ने कुछ कांप्लेक्स को व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे। वहां भी स्थिति जस की तस है। शहर में सैकड़ों छोटे बड़े व्यावसायिक भवनों में पार्किंग कागजों में है और दुकान, गोदाम शो रूम संचालित हो रह हैं।
रोड का कब्जा भी नहीं हटाया गया
दीपावली से तीन दिन पहले वीडीए उपाध्यक्ष ने रात में सिगरा, रथयात्रा, महमूरगंज में बेसमेंट की पार्किंग चेक कराई थीं। अधिकांश में नियम विरुद्ध कार्य दिखे। उपाध्यक्ष ने बेसमेंट खाली कराने का आदेश दिया। आदेश के बाद मातहतों ने खानापूर्ति कर दी। बेसमेंट खाली तो दूर रोड का कब्जा भी नहीं हटाया गया है। मामले में जोनल अधिकारी को एफआईआर कराने के भी निर्देश दिए गए थे। दूसरी ओर जिन अस्पतालों को नोटिस दिए गए थे, उनमें वरुणा पार के शुभम हॉस्पिटल, एसपी सर्जिकल, लक्ष्मी मेमोरियल, काशिका चिल्ड्रेन हॉस्पिटल, समर्पण हॉस्पिटल, त्रिमूर्ति हॉस्पिटल, हिवेल हॉस्पिटल, चेतना नर्सिंग होम शामिल हैं।
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