वाराणसी। सुरसरी तट पर शनिवार की शाम संगीत के संगम से प्रवासी भारतीय सम्मेलन का शंखनाद हुआ। 21 से 23 जनवरी तक वाराणसी में होने वाले 15 वें प्रवासी भारतीय दिवस कार्यक्रम को लिए कलाकारों ने विभिन्न तरह के कार्यक्रम पेश कर इस आयोजन को भव्य बना दिया। अस्सी घाट पर आतिशबाजी के साथ कार्यक्रम का आगाज हुआ। इस आयोजन के साथ ही सम्मेलन का काउंटडाउन भी शुरू हो गया।
सात बटुक और कन्याओं ने किया शंखवादन
शंखनाद से शुरू हुए 100 दिन के कार्यक्रम का शुभारंभ रामजनम योगी, सात बटुक एवं पाणिनी कन्या विद्यालय की सात कन्याओं के शंखवादन से हुआ। इसके बाद रुद्राशंकर मिश्र, स्नेहा बजाज का कथक नृत्य एवं सुचरिता गुप्ता द्वारा उपशास्त्रीय गायन किया गया। वहीं राधाकृष्ण बालिका इंटर कॉलेज की कन्याओं ने पूरे भारत के अलग अलग राज्यों की कलाओं से सभी को भारतीय कलाओं की विविधता के बारे में बताया। स्विट्जरलैंड की फ़ानी उर्फ मीरा और बनारस घराने में गुरु रविशंकर मिश्र की शिष्य ने पहले दादारा में देवी स्तुति पर कथकनृत्य प्रस्तुत किया।
प्रवासी भारतीस सम्मेलन का थीम सांग प्रणव और उनकी टीम ने प्रस्तुत किया, जबकि कार्यक्रम के अंत में नादार्चुन क्लासिकल बैंड की धुन पर सभी झूम उठे। वायलिन वादक सुखदेव मिश्रा और अशोक पांडेय की टीम ने समा बांध दिया। वहीं काउंटडाउन टाइमर का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का समापन रंगीन आतिशबाजी और आकाशदीप छोड़कर किया गया। शुभारंभ कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने किया। इस दौरान उन्होंने 15 में प्रवासी भारतीय दिवस कार्यक्त्रस्म को पूरी भव्यता के साथ संपन्न कराए जाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने काशी वासियों का आह्वान करते हुए कहा कि प्रवासी भारतीय दिवस कार्यक्रम में प्रतिभाग करने के लिए काशी आने वाले विदेशी मेहमानों का स्वागत एवं सम्मान परंपरागत तरीके से किया जाए। इस मौके पर सीडीओ, डीडीओ, अपर नगर आयुक्त सहित कई लोग उपस्थित रहे।