मऊ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट लोकेश नागर ने मारपीट के मामले में नामजद तीन आरोपियों को दोषी पाए जाने के बाद सभी को परिवीक्षा अधिनियम के अंतर्गत सदाचार बनाए रखने की हिदायत देते हुए छोड़ दिया गया।
मामला सरायलखंसी का है। मामले के अनुसार नसोपुर गांव निवासी विरजू की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई। वादी के अनुसार जमीन के विवाद को लेकर उसके गांव के ही आरोपीगण शिवमुनी, शिवकुमार और स्वामीनाथ ने गालीगलौज करते हुए नरायन तथा राजदेव से मारपीट कर घायल कर दिया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी रामध्यान पांडेय ने चार गवाहों के द्वारा अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने अपने ऊपर लगाए गए आरोप को झूठा बताया। सीजेएम ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा सभी साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपीगण शिवमुनी, शिवकुमार और स्वामीनाथ को मारपीट मामले में दोषी पाया। सभी को परिवीक्षा अधिनियम के अंतर्गत उनपर रियायत करते सदाचार बनाए रखने की हिदायत देते हुए छोड़ दिया।