वाराणसी। शहर की सड़कों को लेकर गड्ढामुक्त और मक्खन से होने का ख्वाब पाले हैं तो भूल जाएं। फिलहाल तो स्थिति यह है कि कौन सी सड़क कब धंस कर ‘मौत का कुआं’ बन जाए पता नहीं। नई बनी सड़क भी जगह-जगह धंस रही हैं। उधर, प्रमुख मार्गों पर जगह-जगह गड्ढों ने मुसीबत और बढ़ा दी है। अधिकारियों की अनदेखी और निर्माण में मानकों का पालन न होना इसका प्रमुख कारण है। जगह-जगह खुदाई ने राहगीरों की मुश्किल और बढ़ा दी है।
शहर में जेपी मेहता, कैंट, कचहरी के अलावा वे इलाके अधिक खतरनाक हैं जहां खुदाई करने के बाद सड़कों को पाटा गया है। जिन इलाकों में सड़कों का निर्माण कराया गया है वहां गिट्टियों के उखड़ने का क्रम जारी है। कचहरी से सर्किट हाउस रोड पर 50 मीटर की दूरी पर ही दो जगह सड़क धंस गई है। शहर की सिगरा, रवींद्रपुरी, जेपी मेहता, बेनियाबाग, नई सड़क, पियरी, औरंगाबाद, सोनिया, मंडुवाडीह आदि की सड़कें खस्ताहाल हैं।
कहीं विकास कार्य के नाम पर खुदाई करके गिटटी डालकर छोड़ दिया गया है तो कहीं सड़कों पर डाली गई गिट्टियां उखड़ गईं। शहर में अधिकतर सड़कें नगर निगम की हैं और मुख्य सड़कें पीडब्ल्यूडी के अधीन हैं। निगम के अधिकारी सड़कों की खुदाई करने वालों से कटिंग के नाम पर पैसा तो जमा करा लेते हैं लेकिन मरम्मत किस प्रकार से की जा रही है इसे देखने की जहमत नहीं उठाते हैं। इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। मरम्मत के दौरान गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाता तो इस प्रकार सड़कों के धंसने की समस्या न आती। पीडब्ल्यूडी भी टेंडर करने के बाद सड़कों की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं रखता है।