वाराणसी। निजीकरण का विरोध कर रहे कर्मचारियों के आन्देालन का खामियाजा आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। लोगों को बिजली बिल के साथ सरचार्र्ज भी जमा करना पड़ रहा है। इससे उपभोक्ता परेशान हैं। आए दिन बिल को लेकर बिजली विभाग के काउंटरों पर कहासुनी की स्थिति बन रही है, लेकिन हार मानकर अधिभार उपभोक्ताओं को ही जमा करना पड़ रहा है।
कैबिनेट के फैसले में वाराणसी, गोरखपुर सहित पांच शहरों में बिजली को निजीकरण करने का फैसला लिया गया। इसके विरोध में विद्युत मजदूर पंचायत और अभियंता संघ की ओर से संयुक्त मोर्चा बनाकर 19 मार्च से लेकर 5 अप्रैल तक आन्दोलन किया गया। इसमें कभी दिन भर, कभी दोपहर 12 बजे से पंाच बजे तक कभी दो बजे से पांच बजे तक कार्य का बहिष्कार किया। ऐसे में कार्यालय भी बंद रहे। कार्यालय बंद रहने से उपभोक्ता अपने बिजली के बिल जमा नहीं कर पाए। ऐसी स्थिति में जब इनका आन्दोलन समाप्त हुआ तब तक बिजली के बिल जमा करने की तिथि समाप्त हो गई। ऐसी स्थिति में अब उपभोक्ताओं को सरचार्ज जमा करना पड़ रहा है। इससे काउंटर पर कर्मचारियों और उपभोक्ताओं के बीच कहासुनी की स्थिति बन रही है।
3. 5 लाख हैं शहर में उपभोक्ता
वाराणसी जोन में वाराणसी जिल के अलावा चंदौली, जौैनपुर, गाजीपुर जिले भी हैं। इसमें करीब 12 लाख उपभोक्ता हैं। इनमें से भी 3.5 लाख उपभोक्ता केवल शहर में हैं। इसमें कम से कम 10 प्रतिशत करीब 30 हजार उपभोक्ता हैं, जो समय से अपना बिल जमा नहीं कर पा रहे हैं। ऐेसी स्थिति में इन सभी उपभोक्ताओं को बिजली बिल के साथ सरचार्ज जमा करना पड़ेगा।
लिखा है पत्र
हड़ताल के दौरान जिन उपभोक्ताओं का बिजली का बिल जमा नहीं हो सका है और उनको सरचार्ज जमा करना पड़ रहा है। इसके लिए बुधवार को विभाग के एमडी, चेयरमैन को पत्र लिखकर सरचार्ज को अगले माह के बिल के साथ समायोजन करने के लिए कहा गया है।
आरके वाही, संयोजक, विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति
अधिकारियों को लिखेंगे पत्र
हड़ताल के दौरान काउंटर को छोड़ दिया जाए तो ऑन लाइन और कियोस्क से बिजली बिल जमा करने का कार्य जारी रहा। इसके बाद भी कुछ उपभोक्ता बिजली का बिल जमा नहीं कर पाए, उनका सरचार्ज माफ करने के लिए उचाधिकारियों को लेटर लिखा जाएगा।
एके श्रीवास्तव, मुख्य अभियंता, वाराणसी क्षेत्र