वाराणसी। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य पद पर चयन को लेकर मचे घमासान के बीच भारत धर्म महामंडल के पदाधिकारी अब आत्म शुद्धता के लिए भगवान की शरण में जाएंगे। सोमवार को शंकराचार्य चयन के मसले पर उपजे विवादों को लेकर मन और अंत:करण की शुद्धता के लिए यज्ञ किया जाएगा। यह बुद्धि शुद्धि यज्ञ ज्योतिष्पीठ के खोजकर्ता और भारत धर्म महामंडल के संस्थापक स्वामी ज्ञानानंद के उस यज्ञ मंडप में होगा, जिसकी उन्होंने खुद स्थापना की थी। शंकराचार्य पद पर स्वामी स्वरूपानंद का अभिषेक करने वाले धड़े के सहायक मंत्री दिनेश मणि त्रिपाठी ने बताया कि यह यज्ञ उन पदाधिकारियों की आत्म शुद्धता के लिए है, जिनकी बुद्धि भ्रष्ट हो चुकी है।
शंकराचार्य के पद पर द्वारिका-शारदा पीठाधीश्वर जगदगुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के अभिषेक को लेकर दो धड़ों में बंटे भारत धर्म महामंडल के पदाधिकारी अब एक-दूसरे के बहुमत को साबित करने के लिए एड़ी -चोटी का जोर लगा रहे हैं। अभिषेक करने वाले धड़े के निलंबित पांच पदाधिकारियों ने इस मसले पर कानूनी सलाह ली है। शनिवार को महामंडल परिसर में दोनों धड़ों के पदाधिकारियों ने आमने-सामने इस मुद्दे पर जिरह की और एक-दूसरे के निर्णय को सही ठहराते रहे। अभिषेक करने वाले धड़े के ज्वाइंट जनरल सेक्रेटरी सत्येंद्र मिश्र का कहना था कि स्वरूपानंद के चयन का निर्णय बहुमत के आधार पर लिया गया है। इसे चुनौती नहीं दी जा सकती। उनका कहना था कि जल्द ही जनरल सेक्रेटरी समेत सात पदाधिकारियों के निलंबन की कार्रवाई उनके धड़े की ओर से की जाएगी। वहीं सहायक मंत्री कुंवर पाल वर्मा का कहना था बहुमत उनके साथ है। शंकराचार्य चयन की प्रक्रिया हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में नियमानुसार कराई जाएगी। बुद्धि शुद्धि यज्ञ का ढोंग करने वाले अलग थलग पड़ गए हैं।
सत्यनारायण पांडेय, उपाध्यक्ष, भारत धर्म महामंडल ने कहा कि स्वामी ज्ञानानंद की ओर से स्थापित यज्ञमंडप में यज्ञ उन सभी पदाधिकारियों की बुद्धि शद्धता के लिए किया जाएगा, जिन्होंने विवेक खो दिया है। स्वामी ज्ञानानंद से उनके लिए सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की जाएगी।
प्रो. प्यारे सिंह, चीफ सेक्रेटरी ने बताया कि स्वरूपानंद का अभिषेक नियम के विपरीत किया गया है। हम निष्पक्ष और नियमानुसार चयन प्रक्रिया अपनाने के अपने फैसले पर अडिग हैं। बुद्धि शुद्धि यज्ञ वो लोग कर रहे हैं, जिनकी बुद्धि नष्ट हो चुकी है। इससे फर्क पड़ने वाला नहीं है।