वाराणसी। पद्मश्री साहित्यकार मनु शर्मा की तेरहवीं पर सोमवार को आयोजित श्रद्धांजलि सभा में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि वह अद्भुत प्रतिभा और काल्पनिक क्षमता के धनी थे। श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि वह उन्हें न तो शर्मा जी और न ही पंडित जी कहकर पुकारते थे। हमेशा बाबूजी कहते थे। बाबूजी जब तक जीवित रहे समाज के लिए सोचा और योगदान किया। साहित्य और समाज में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
नाटी इमली स्थित गणेश मंडपम में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में गृहमंत्री ने ‘फेरी वाला रचनाकार’ पुस्तक का विमोचन किया। उन्होंने बताया कि ‘पहली बार 1992-93 में उनकी बाबूजी से मुलाकात लखनऊ स्थित आवास पर हुई थी। तब मैं प्रदेश का शिक्षामंत्री था। वे बोलना शुरू करते थे तो कभी शब्दों को गढ़ने और चयन करने में अधिक परिश्रम नहीं करना पड़ता था। उनकी अभिव्यक्ति में सहजता थी। उनसे मिलने, सुनने, समझने के बाद आनंद की अनुभूति होती थी।
वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा ने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि पंडित मनु शर्मा के साथ काफी समय गुजारा। उनकी कमी आशीर्वाद के लिए खलेगी। उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को हमेशा याद किया जाएगा। श्रद्धांजलि सभा में प्रदेश के मंत्री ब्रजेश पाठक, महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री कृपाशंकर सिंह, भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी, देवी प्रसाद द्विवेदी, विधायक सुशील सिंह, अवधेश सिंह, शंकर गिरी, मणिशंकर पांडेय सहित विभिन्न दलों के नेता और शहर के गणमान्य लोग शामिल हुए। श्रद्धांजलि सभा में मनु शर्मा के जीवन पर आधारित वृत्त चित्र ‘महायुद्ध के सारथी’ का प्रदर्शन किया गया। गृहमंत्री के आगमन से पहले वरिष्ठ पार्टी नेता कलराज मिश्र भी यहां श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
दोपहर एक बजे बाबतपुर एयरपोर्ट से गृहमंत्री राजनाथ सिंह सीधे सर्किट हाउस पहुंचे। यहां मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी, अशोक धवन, गुरु नारायण सिंह, देवानंद सिंह आदि ने उनका स्वागत किया। गृहमंत्री ने पार्टी नेताओं से निकाय चुनाव का फीडबैक लिया। यहां वह मीडिया से बातचीत करने वाले थे लेकिन ऐनवक्त पर आचार संहिता का हवाला देकर कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। वहीं, गणेश मंडपम में आयोजित श्रद्धांजलि सभा से वापस एयरपोर्ट जाते समय गृहमंत्री गांधी नगर, सिगरा पहुंचे। यहां एक वैवाहिक समारोह में शामिल हुए। तकरीबन पांच मिनट परिवार वालों से बातचीत की और वर-वधू को आशीर्वाद देकर एयरपोर्ट से दिल्ली रवाना हो गए।