वाराणसी। जीएसटी लागू होने के चार महीने बाद भी व्यापार, उद्योग, चार्टर्ड एकाउंटेंट्स और कर सलाहकार इसके प्रावधानों को पूरी तरह समझने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। हर वर्ग जीएसटी को अपरिहार्य मान रहा है लेकिन उनका कहना यह भी है कि इसकी जटिलताएं और विसंगतियां दूर किए बगैर इसका फायदा नहीं होगा। रिटर्न भरने की समय सीमा तिमाही या छमाही करने की मांग की गई। इन सभी को 10 नवंबर को होने जा रही जीएसटी काउंसिल की बैठक से बहुत उम्मीदें हैं।
बुधवार को चांदपुर स्थित अमर उजाला कार्यालय में जीएसटी पर विचार-विमर्श में उद्यमियों, व्यापारियों और टैक्स जानकारों ने रोजमर्रा में आने वाली समस्याओं के साथ-साथ इनके समाधान पर विस्तार से बातचीत की। इस दौरान वक्ताओं ने यह भी कहा कि एक राष्ट्र-एक कर के उद्देश्य को पूरा करने के लिए जीएसटी पूरी तैयारी से लागू करना चाहिए था। व्यावहारिक पहलुओं को नजरअंदाज कर जीएसटी लागू करने में जल्दबाजी दिखाई गई। इसी का नतीजा है कि मॉडल जीएसटी से वास्तविक जीएसटी बिल्कुल अलग है। आए दिन जीएसटी काउंसिल की ओर से किए जाने वाले बदलावों से असमंजस की स्थिति पर चिंता जताई गई। हालांकि राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के माध्यम व्यापार-उद्योग संगठनों की बात जीएसटी काउंसिल तक पहुंचने को सुखद संकेत माना गया।
सभी वक्ताओं ने स्वीकार किया कि जीएसटी लागू होने के बाद पारदर्शिता बढ़ी है। इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। वक्ताओं ने आशा जताई कि समस्याओं के मद्देनजर किए जा रहे संशोधन से पूरी प्रणाली का सरलीकरण हो जाएगा। कार्यक्रम में नोटबंदी का एक साल पूरा होने पर भी चर्चा हुई और इसे देश में भ्रष्टाचार मुक्त विकास के लिए प्रभावी कदम बताया गया।