वाराणसी। कालरात्रि में महानिशा पूजा के लिए मां काली की नयनाभिराम प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में कलाकार जुटे हैं। मां काली की प्रतिमाओं की प्रतिष्ठापना कार्तिक चतुर्दशी की रात को होगी। देवनाथपुरा में नवसंघ के पंडाल में सबसे बड़ी 24 फीट की प्रतिमा विराजेगी। यह शहर की सबसे संवेदनशील प्रतिमाओं में है। 1991 में इसी प्रतिमा के विसर्जन के दौरान दो संप्रदायों के बीच हुए बवाल में 28 लोगों की जान चली गई थी।
नवसंघ के पंडाल में सबसे बड़ी काली प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा 18 अक्तूबर की रात 8:33 बजे पं. देवाशीष मुखर्जी कराएंगे। अमावस अर्थात 19 अक्तूबर की रात तांत्रिक विधि से महानिशा पूजा होगी। 20 को भंडारा और 21 अक्तूबर को धुनुचि, ढाक नृत्य प्रतियोगिता होगी। 22 अक्तूबर की शाम 301 महिलाओं को वस्त्र वितरित किया जाएगा और 23 को शाम पांच बजे विसर्जन शोभायात्रा निकाली जाएगी।
नवसंघ के अध्यक्ष असित दास ने बताया कि इस बार गोल्डेन जुबली वर्ष मनाया जा रहा है। संकरी गलियों से प्रतिमा को निकालने के लिए चबूतरों को हटाया जाना जरूरी है। विसर्जन मार्ग पर गलियों की मरम्मत, सड़क का पैचवर्क न होने से पूजा समिति के पदाधिकारी परेशान हैं। शोभायात्रा देवनाथपुरा कला, देवनाथपुरा खुर्द, पांडेय हवेली, मदनपुरा, जंगमबाड़ी, गोदौलिया, बांस फाटक, चौक, बुलानाला, मैदागिन होते हुए कंपनी बाग जाएगी। इसके अलावा सोनारपुरा में वाणी संघ, भेलूपुरा में शारदोत्सव संघ और गिरजाघर के पास भी मां काली की प्रतिमाओं की प्रतिष्ठापना पंडालों में की जाएगी।
1968 में शुरू हुई थी नवसंघ की काली पूजा
देवनाथपुरा में नवसंघ की काली पूजा1968 में पूजा आरंभ हुई थी। 13 नवंबर 1991 में प्रतिमा विसर्जन के दौरान आतिशबाजी हो रही थी। क्लब के अध्यक्ष असित दास बताते हैं कि आतिशबाजी के दौरान कुछ लोग हस्तक्षेप कर रहे थे। उसी समय विवाद शुरू हो गया और फिर बवाल बढ़ गया। तब बवाल में 28 लोगों की मौत हो गई थी।