वाराणसी। भारत में फीफा अंडर-17 वर्ल्ड कप के आयोजन ने फुटबाल खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों में उत्साह का संचार कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी इस वर्ल्ड कप को देश में फुटबाल की नई शुरुआत के रूप में देख रहे हैं। लोगों को भरोसा है कि भारत के खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन कर फुटबाल को नई ऊंचाई देंगे। बनारस के खिलाड़ी भी इस आयोजन से काफी उत्साहित हैं।
खेल के मामले में बनारस कभी दो भागों में बंटा था। वरुणा पार हॉकी और इस पार फुटबाल के खिलाड़ियों का दबदबा रहा है। नेशनल की जूनियर टीम हो या सीनियर दोनों में बनारस के खिलाड़ी जरूर शामिल रहते थे। यही नहीं, जब बेनिया बाग मैदान या सिगरा स्टेडियम में फुटबाल मैच होते थे तो हजारों की तादाद में दर्शक जुटते थे। बनारस में फुटबाल को आगे बढ़ाने में अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी शम्शी रजा, नसीम अख्तर और जूनियर लेवल पर नूर आलम व इमरान का सराहनीय योगदान रहा है। बाद में सरकारी उपेक्षा और एसोसिएशनों की आपसी रार की वजह से बनारस में फुटबाल अपनी रंगत खोता गया। अब भारत में हो रहे फुटबाल के महा मुकाबले से इस खेल को नया जीवन मिलने की उम्मीद लोगों में जगी है। जो लोग फुटबाल के भविष्य पर सवाल खड़े करते थे, वही अब उत्साहित नजर आ रहे हैं।
- बनारस व आस-पास के जिलों में ऐसी तमाम प्रतिभाएं हैं, जो फुटबाल को नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं। जरूरत है कि योग की तरह ही फुटबाल को भी प्रचार-प्रसार और आगे बढ़ाने की कोशिश की जाए। - फरमान हैदर, पूर्व चीफ कोच साई
- बनारस में आज भी फुटबाल बचा हुआ है। प्रधानमंत्री फुटबाल को गांव-गांव तक ले जाने का प्रयास कर रहे हैं। हिंदुस्तान के लिए और फुटबाल खिलाड़ियों के लिए यह एक नई शुरुआत है। - मुश्ताक अली, अंतरराष्ट्रीय फुटबाल खिलाड़ी और लक्ष्मण अवार्ड विजेता