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आनन-फानन में काऊ शेड किया दुरुस्त

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गोकुल मिशन के तहत गंगातीरी गायों के रहने और खानपान के लिए वहां पर दो विशालकाय शेड बनाए जा रहे हैं। इन विशालकाय शेड में दो चरनी बड़े जानवरों के लिए तथा दो छोटे जानवरों के लिए बनाई गई है। इन चरनी के पीछे का हिस्सा समतल नहीं था। गाय अगर यहां से मात्र एक या दो फीट भी पीछे हटती तो तीन चार फिट नीचे गिर सकती थी। क्योंकि पीछे की भूमि लगभग तीन फीट नीची रखी गई थी।
वहां पर जमीन समतल न होने से गायों के गिरने का खतरा बना हुआ था। यहां ऊंचाई का अंतर दो से तीन फीट का था। प्रधानमंत्री के आगमन के मद्देनजर अब इस कार्य में तेजी लाई गई और यहां पर बिछाए गए ईंटों को उखाड़ कर फिर से मिट्टी भराई की गई। ताकि गाय पीछे की तरफ हटे तो जमीन पर न गिरे। इस बारे में पूछे जाने पर निर्माण कार्य से जुड़े लोग कुछ भी बताने से बचते रहे। सूत्र बताते हैं कि इस शेड के निर्माण में कई खामियां पहले से ही रह गई हैं। इतने बड़े शेड में चारों तरफ से ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई है जिससे जाड़े के समय गायों को ठंड से सुरक्षा मिल सके। साथ ही गर्मी के दिनों में शेड के अंदर धूप आने की पूरी आशंका जताई जा रही है।
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समय से पूरा नहीं हुआ गायों का शेड
भले ही केंद्र सरकार यह दावा करती हो कि वह अपने कार्यकाल में हुए उद्घाटन का लोकार्पण अपने ही कार्यकाल में करती है। पर
शांहशाहपुर में गंगातीरी गायों के लिए निर्माण का कार्य अपने पूर्व निर्धारित समय से काफी विलंबित चल रहा है। गोकुल मिशन के तहत इस शेड के निर्माण के लिए वर्ष 2015 के जून में केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने शिलान्यास किया था और इसे जून 2017 तक पूरा हो जाना था लेकिन यह निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है। जबकि इसे देखने के लिए पिछले दिनों भारत सरकार के विशेष सचिव भी आए थे। मुख्य विकास अधिकारी ने भी कई बार इस परिक्षेत्र का दौरा कर मौका मुआयना किया था। यहां पर लगे शिलापट्ट के अनुसार 402 लाख रुपये की लागत से बनने वाले इस शेड को अब तक बन जाना था तथा फार्म को हैंडओवर कर देना था।
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