वाराणसी। रंगों के पर्व होली में हर्बल रंगों का प्रयोग आपकी त्वचा और आंखों को होने वाले नुकसान से बचा सकते हैं। जबकि सीसे मिला होने के कारण सिंथेटिक रंग काफी घातक साबित हो सकते हैं। हर्बल रंग घर पर टेसू, पलास, गेंदा और गुलाब के फूलों से भी तैयार किए जा सकते हैं।
चिकित्सकों के अनुसार, सिंथेटिक रंगों में सीसे की मात्रा इतनी अधिक होती है कि चेहरा खराब होेने के साथ एलर्जी और आंखों को नुकसान हो सकता है। रासायनिक रंगों से पटे बाजार में हर्बल रंग भी उपलब्ध हैं। इनकी कीमत सिंथेटिक रंगों से अधिक जरूर है, लेकिन इनका प्रयोग समझदारी है। चेहरा साफ करने के दौरान यह रंग आसानी से छूट जाते हैं।
ऐसे बना सकते है हर्बल रंग
हर्बल रंग बाजार से खरीदने के बजाय घरों में तैयार करना ज्यादा लाभकारी है। हल्दी, अनार के छिलके, टेसू, पलास व गुलाब के फूल, मेंहदी की पत्तियाें आदि से आसानी से तैयार किए जा सकते हैं। हर्बल अबीर तैयार करने के लिए हल्दी पाउडर, गेंदे और गुलाब के फूलों को सुखाकर बनाया जा सकता है। बीएचयू आयुर्वेद संकाय के द्रव्यगुण विभाग के प्रो. केएन द्विवेदी के अनुसार, टेसू और पलास के फूल बरकछा सहित अन्य जगहों पर आसानी से मिल जाएंगे। हल्दी से पीला, गेंदे की पत्ती से हरा रंग, नील के बीज से नीला रंग बनाया जा सकता है।
होली के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग में अलर्ट जारी हो गया है। बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल, जिला और मंडलीय अस्पतालों में बेड रिजर्व रखने का निर्णय लिया गया है। इमरजेंसी ड्यूटी करने वाले चिकित्सकों और कर्मचारियों की सूची भी तैयार कराई जा रही है। अस्पतालों में सोमवार को होली के दिन ड्यूटी और इलाज की तैयारियां होती रहीं। सीएमओ डॉ. वीबी सिंह ने बताया कि बीएचयू समेत सभी अस्पतालों के मुख्य/प्रमुख चिकित्सा अधीक्षकों को दस-दस बेड रिजर्व रखने के लिए मंगलवार को पत्र भेजा जाएगा।