वाराणसी। बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान में भारतीय कृषि अभियंताओं की समिति के तीन दिवसीय संगोष्ठी के पहले दिन कृषि, पशुपालन आदि क्षेत्रों में विज्ञान और तकनीक के प्रयोग पर चर्चा हुई। बतौर मुख्य अतिथि प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि प्रदेश सरकार ने बीएचयू के पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान संकाय में भ्रूण हस्तांतरण तकनीक के उपयोग लिए चुना है। इसके तहत बीस करोड़ रुपये स्वीकृत किया गया है। तकनीक के माध्यम से बकेना हो गए जानवरों का कायाकल्प किया जाएगा। इससे दुग्ध उत्पादन में नई क्रांति आएगी।
शताब्दी कृषि सभागार में आयोजित संगोष्ठी में कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने देश के खाद्य और पोषण सुरक्षा पर कृषि इंजीनियरों की भूमिका की सराहना की। संस्थान के निदेशक से आईआईटी बीएचयू के साथ मिलकर जल्द से जल्द बीटेक (कृषि) की डिग्री कार्यक्रम शुरू करने को कहा।
कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्रा ने कहा कि देश ने दूध उत्पादन में 6 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर हासिल की है, जिससे भारत विश्व में प्रथम स्थान पर है। देश ने अंडा उत्पादन में 45 गुना से अधिक वृद्धि और मछली उत्पादन में 20 प्रतिशत निर्यात वृद्धि से 7 बिलियन अमेरिकी डॉलर की आय हुई है। अतिथियों का स्वागत निदेशक प्रो. रमेश चंद ने किया। कार्यक्रम में इंडियन सोसाइटी ऑफ एग्रीकल्चर इंजीनियर्स के अध्यक्ष प्रो. इंद्र मणि, प्रो. राम मंदिर सिंह, डॉ. आशुतोष उपाध्याय, एसके दास, आरके पंडा, प्रो. रमादेवी, प्रो. वीके शुक्ला, डॉ. विजेंद्र सिंह, प्रो. एपी सिंह आदि मौजूद रहे।