वाराणसी। तारकोल की सड़क को मजबूती देने के लिए उसे बनाते समय टेंडम वाइब्रेटरी रोलर से रोल करना जरूरी होता है। इसकी वाइब्रेशन से गिट्टियों और तारकोल के बीच का गेप निकल जाता है। उसके बाद सरफेस के लिए स्टेटिक रोलर चलाना होता है। टेंडम वाइब्रेटरी रोलर चलवाना स्टेटिक रोलर की अपेक्षा महंगा होता है। इस तरह पैसे बचाने के खेल में सड़कें बदहाल रहती हैं। हालांकि प्रशासन का तर्क है कि पाइप लाइन लीकेज की वजह से वाइब्रेटर नहीं चलवाते।
काशी में बन रहीं ज्यादातर सड़कों को बिना टेंडम रोलर के बनाया जाता है। यही वजह है कि ये सड़कें दो या तीन महीने में ही उखड़ जाती हैं। सिविल इंजीनियर्स के अनुसार टेंडम वाइब्रेटरी रोलर न चलाने से जो गेप रह जाता है उनमें हवा भर जाती है, जैसे ही थोड़ा बहुत पानी पड़ता है या बरसात होती है तो यह पानी गेप में चला जाता है। पानी से तारकोल की गिट्टियों पर पकड़ कम हो जाती है और सड़क उखड़ने लगती है। वाइब्रेटरी रोलर का किराया ढाई हजार रुपये प्रति घंटे तक होता है, जबकि स्टेटिक रोलर का किराया1200 से 1500 रुपये होता है। इंजीनियर्स के अनुसार टेंडम वाइब्रेटरी रोलर न चलवाने से पैसा बचता नहीं है, बल्कि सड़क जल्द टूट जाती है और बार बार सड़क बनवाने में ज्यादा खर्च होता है और लोग भी परेशान रहते हैं। सिगरा, महमूरगंज, मंडुवाडीह, लंका क्षेत्र, लहरतारा, कचहरी, मैदागिन के पास पिछले एक साल में दो से तीन बार बन चुकी हैं। इसके बावजूद जगह जगह से टूटी हैं। लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
प्रशासन का तर्क
अधिकारियों का कहना है कि कई जगह नीचे पाइप लाइन बिछी है। इसलिए टेंडम वाइब्रेटरी रोलर नहीं चलाया जाता। इससे पाइपलाइन में लीकेज होने का खतरा होता है। इस पर सवाल यह उठता है कि पाइपालाइन वाली जगहों पर तारकोल की सड़कों की जगह आरसीसी (सिमेंटेड) सड़कों के विकल्प पर विचार क्यों नहीं किया जा रहा।
पता है जल्द खुदाई होनी है, फिर बनवा देते हैं सड़क
प्रवासी भारतीय सम्मेलन के पूर्व जब बैठक हुई तो उस दौरान 75 लाख रुपये के बजट के साथ सिगरा महमूगरंज की सड़क को बनाने का निर्देश पीडब्ल्यूडी को दिया गया। इस पर पीडब्ल्यूडी ने ऐतराज किया था कि 75 लाख रुपये बेकार जाएंगे, क्योंकि अभी इस सड़क पर जल निगम को खुदाई करनी है। इस पर जल निगम के प्रमुख सचिव मनोज कुमार ने कहा था कि आप सड़क बनाइए। सड़क दोबारा बनाने के लिए अलग बजट की भी व्यवस्था कराई जाएगी। इसके बाद यह सड़क बना दी गई। अभी इस सड़क की खुदाई जल निगम करेगा।
वाइब्रेटरी रोलर नहीं चलाएंगे तो सड़क ठीक से नहीं बैठेगी। वह उखड़ेगी और धंसेगी ही। विभागीय लोग पैसा बचाने के लिए यह करते हैं तो भी गलत है। वाइब्रेटर चलाने से पाइप टूटने का डर है तो पाइप लाइन को किनारे डालें, बीच में नहीं। अब तो नई तकनीक आ गई है, जिसमें रोलर और वाइब्रेटर दोनों साथ होते हैं। बटन दबाने पर रोलर और दूसरा बटन दबाने पर वाइब्रेटर का काम करते हैं।
-डा. बृंद कुमार, सिविल इंजीनियरिंग विभाग, बीएचयू
सिगरा महमूगरंज की सड़क केवल बेहतर यातायात के लिए बनाई गई थी। अभी इस पर जल निगम खुदाई करेगा। प्रवासी भारतीय सम्मेलन के चलते इसे बनाई गई है। तारकोल की सड़क पर टेंडम वाइब्रेटरी रोलर चलना चाहिए मगर नीचे पाइपलाइन होने की वजह से यह नहीं चल पाता।
-जीपी पांडेय, मुख्य अभियंता, पीडब्ल्यूडी