वाराणसी। शिया समुदाय की अकीदत का मरकज दरगाह-ए-फातमान के संस्थापक अल्लामा शेख अली हजी की 260वीं बरसी पर गुरुवार को उनकी मजार को फूलों से सजाया गया। गुलाब के फूलों की चादर चढ़ाई गई तो 260 शमा रौशन कर खिराजे अकीदत पेश की गई। इस अजीम शख्सियत को मानने वालों ने बड़ी शिद्दत से याद किया। मुस्लिम ही नहीं दूसरे मजहब के लोग भी उन्हें खिराजे अकीदत पेश करने के लिए उनकी मजार पर मौजूद होकर गंगा जमुनी तहजीब की भी मिसाल पेश की।
दरगाह-ए-फातमान स्थित अल्लामा शेख अली हजी के रौजे पर गुरुवार को उनकी बरसी मनाई गई। कुरान पाक की तिलावत के साथ मजलिस का आगाज हुआ। मौलाना सैयद मोहम्मद अकील हुसैनी ने मगरिब की नमाज अदा कराई। मौलाना नदीम असगर ने मजलिस पढ़ी। कहा कि अल्लामा शेख अली हजी जैसी शख्सियत को हमें अपने किरदार में उतारना चाहिए। मौलाना जहीन हैदर और डॉ. शफीक हैदर ने कलाम पेश किया। मौलाना जमीरुल हसन रिजवी ने दुआख्वानी की। दुआख्वानी के बाद उनके रौजे पर शमा रौशन की गई। इस मौके पर फरमान हैदर, मुतवल्ली अब्बास रिजवी शफक, फिरोज हुसैन, जौहर हुसैन, शाहीन, बुनियाद हुसैन, जहीर आबिद, हैदर, रमेश गुप्ता आदि मौजूद रहे।