वाराणसी। बीएचयू में चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयाना सिंह को पद से हटाने की मांग को लेकर सातवें दिन भी कोई फैसला नहीं हुआ। गुरुवार को कुलपति ने धरनारत छात्रों को बातचीत के लिए बुलाया। छात्र बातचीत करने पहुंचे, लेकिन दो घंटे तक चली वार्ता विफल रही। समिति कक्ष में हुई बैठक में छात्र कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। जब कुलपति की ओर से कोई निर्णय नहीं हुआ तो छात्रों ने धरना जारी रखने का निर्णय लिया। उधर, बीएचयू सिंह द्वार पर प्रतिरोध सभा के माध्यम से ज्वाइंट एक्शन कमेटी, एनएसयूआई, आईसा, बीसीएम सहित अन्य संगठनों ने चीफ प्रॉक्टर को हटाने की मांग की।
विश्वविद्यालय केंद्रीय कार्यालय पर सात दिन से छात्र धरने पर बैठे हैं। गुरुवार सुबह उन्होंने हाथ में गुलाब का फूल लेकर प्रदर्शन किया। दोपहर करीब ढाई बजे कुलपति ने दस छात्रों से बातचीत के लिए बुलाया। कुलपति ने उन्हें जांच समिति गठित करने की जानकारी दी, लेकिन छात्र इस पर मानने को तैयार नहीं हुए। चीफ प्रॉक्टर को पद से हटाकर हाईकोर्ट के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली कमेटी से जांच कराने की मांग की। कहा कि पारदर्शिता के लिहाज से समिति में छात्रों को भी रखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि पद पर रहते हुए जांच न्याय संगत नहीं है। इस दौरान कुलपति ने एक छात्र को बाहरी बताया तो उसने तुरंत बीएचयू छात्र होने के प्रमाण के रूप में परिचय पत्र दिखाया। उधर, सिंह द्वार पर शाम को हुई प्रतिरोध सभा में छात्र संगठनों के पदाधिकारियों ने नर्सिंग काउंसिल की मान्यता दिलाने, चीफ प्रॉक्टर को हटाने का मुद्दा पुरजोर ढंग से उठाया। विकास सिंह ने कुलपति के अब तक के कार्यकाल में विश्वविद्यालय में मात्र 46 प्रतिशत उपस्थिति की चर्चा भी की।
महिला प्रॉक्टर पहुंची तो कुलपति ने लौटाया
जिस समय समिति कक्ष में धरनारत छात्रों से कुलपति बातचीत कर रहे थे, इसी बीच दो महिला प्रॉक्टर अंदर पहुंच गईं। इस पर वहां बैठे छात्रों ने आपत्ति जताई, जिसके बाद कुलपति ने दोनों प्रॉक्टर को वापस जाने को कहा। हालांकि छात्रों से बातचीत के समय कला संकाय, समाज विज्ञान संकाय प्रमुख के साथ ही कुछ और शिक्षक मौजूद रहे।