वाराणसी। बीएचयू में शिक्षकों की नियुक्ति में अनियमितता के मामले में हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद नियुक्त शिक्षकों की धुकधुकी एक बार फिर बढ़ गई है। कोर्ट ने कहा है कि विज्ञापन संख्या 1/2017-2018 के परिप्रेक्ष्य में होने वाली असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्तियों पर अंतिम फैसला संबंधित याचिका पर होने वाले अग्रिम आदेशों पर निर्भर करेगी।
बीएचयू के विज्ञान संकाय, महिला महाविद्यालय, आईएमएस समेत अन्य विभागों में ऐसे 100 शिक्षक हैं, जो इसके दायरे में आ रहे हैं। सूत्रों की माने तो कोर्ट के इस आदेश के बाद अब संबंधित शिक्षकों के स्थायीकरण सहित अन्य प्रक्रिया में देरी होने की संभावना है। विश्वविद्यालय में पूर्व कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी के कार्यकाल में असिस्टेंट प्रोफेसर से लेकर प्रोफेसर पद पर विभिन्न संकायों में 215 नियुक्तियां हुई थीं। इन नियुक्तियों पर सवाल खड़ा करते हुए आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी गई थी। विश्वविद्यालय ने जो आरटीआई में जवाब दिया उससे बड़े पैमाने पर अनियमितता का खुलासा हुआ था।
इसके बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर नियुक्तियों को चुनौती दी गई, जिसमें कोर्ट ने गत 28 मई को एक आदेश जारी कर याचीकर्ताओं को कुलपति के पास जाकर प्रत्यावेदन देने और प्रत्यावेदन मिलने से दो माह के भीतर कुलपति को निर्णय लेने का आदेश भी पारित किया था। मामले में याचिकाकर्ताओं ने 16 जुलाई को कुलपति को प्रत्यावेदन दिया और कोर्ट की ओर से निस्तारण की नियत तिथि 15 सितंबर को बीत गई लेकिन निर्णय नहीं हो सका। इसके बाद कुलपति ने कोर्ट से और समय मांगा। इस बीच 12 अक्तूबर को असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर हुई नियुक्तियों को लेकर जारी आदेश के बाद विभागों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। सूत्रों की माने तो याचीकर्ता जल्द ही आदेश की प्रति लेकर कुलपति से मिल सकते हैं। माना जा रहा है कि इस आदेश के बाद इस विज्ञापन के तहत नियुक्त शिक्षकों के स्थायीकरण सहित अन्य प्रक्रिया में देरी भी हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि विश्वविद्यालय प्रशासन अब इस आदेश के बाद कोई जल्दीबाजी नहीं करना चाहेगा।