फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रामनगर की श्रीरामलीला में दी जाती है तोपों से सलामी

विज्ञापन
विज्ञापन
रामनगर। विश्वप्रसिद्ध रामनगर की रामलीला में तोपों से सलामी दी जाती है। इस लीला के नियमित दर्शक भी होते हैं। कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपने दायित्व के निर्वहन को लेकर प्रतिबद्ध रहते हैं। जंग बहादुर सिंह 32 वर्ष से तोपची का कार्य कर रहे हैं। इनके पिता केदार सिंह दादा महादेव सिंह भी तोपची का काम करते थे।
विज्ञापन

लीला के दौरान धनुष यज्ञ, नक्कटैया तथा लक्ष्मण शक्ति की लीला में तोप छोड़ा जाता है। लीला में पहले 21 तोपों की सलामी दी जाती थी लेकिन अब दो तोप में बारूद भरा जाता है लेकिन केवल एक से ही छोड़ा जाता है। जंग बहादुर सिंह जब तोप छोड़ते है तो उनके सहयोगी मनराज, क्षयवर, विजय तथा जितेंद्र सिंह ऊंचे स्थान पर ध्वज दिखाते हैं। जंग बहादुर का मानना है कि जब बारूद भरा जाता है तो काफी रिस्की होता है। आखिर परंपरा है निभाना भी जरूरी है। तोप से संबंधित कार्य करने वाले लोग काशी राज दुर्ग के स्थायी कर्मचारी होते हैं।
इनसेट-----------
नाव की भी होती है अहम भूमिका
रामनगर। रामनगर की श्रीराम लीला में भगवान राम को गंगा जी, यमुना जी पार कराने एवं भगवान विष्णु के क्षीरसागर की आरती के समय नाव की आवश्यकता पड़ती है। महलिया टोला निवासी बब्लू साहनी 12 वर्षों से नाव की सेवा दे रहे हैं। इसमें इनके बड़े भाई सुक्खु ,और भोपाल साहनी साथ देते हैं। बब्बू साहनी बताते हैं कि रामलीला शुरू होने से दो दिन पहले नाव रामबाग पोखरा में लगा देते हैं। पहले दिन की आरती इसी नाव पर होती है। श्रीराम वन गमन के समय एक नाव गंगा जी में जो प्रतीक रूप में रामपुर, सगरा पोखरा पर होती है। भरत जी के आगमन पर भी हम लोग सेवा करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें