वाराणसी। कांग्रेस के नेता आनंद शर्मा ने राफेल डील को शताब्दी का सबसे बड़ा घोटाला बताया है। यूपीए सरकार में तय हुई विमान की कीमत 526 करोड़ रुपये से बढ़कर 1670 करोड़ रुपये हो गई। बावजूद इसके प्रधानमंत्री सदन में इस पर जवाब देने से बच रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार मामले की जेपीसी से जांच कराए।
राज्यसभा में उपनेता प्रतिपक्ष आनंद शर्मा बुधवार को यहां प्रेसवार्ता में कहा कि फ्रांस सरकार की रिपोर्ट के अनुसार राफेल विमान मिस्र और कतर को 1330 करोड़ रुपये प्रति विमान की दर से बेचे गए, जबकि भारत को 1670 करोड़ रुपये के हिसाब से। वायुसेना को 126 विमानों की जरूरत थी मगर केंद्र सरकार ने 36 विमानों की डील की। देश में हवाई जहाज बनाने का सबसे अधिक अनुभव एचएएल को है और यूपीए सरकार ने जो डील की थी उसमें तकनीकी हस्तांतरण के लिए एचएएल को ही चुना गया था लेकिन मोदी सरकार ने डील के 12 दिन पहले बनी कंपनी रिलांयस एयरोस्पेस को इसके लिए चुना। केन्द्र सरकार कहती है कि डील में कुछ गड़बड़ी नहीं है तो जेपीसी का गठन कर मामले की जांच क्यों नहीं करा रही है।
आनंद शर्मा ने कहा कि नोटबंदी भी एक बड़ा घोटाला है। इसकी जांच कराई जानी चाहिए। एससीएटी एक्ट का ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ते हुए आनंद शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर सरकार या सुप्रीम कोर्ट ही कोई बयान दे सकता है। इस मुद्दे पर सरकार अध्यादेश लाई है। इस दौरान पूर्व सांसद डॉ.राजेश मिश्र, पूर्व विधायक अजय राय, जिलाध्यक्ष प्रजानाथ शर्मा, मणींद्र मिश्रा, शैलेन्द्र सिंह आदि कांग्रेसी नेता भी उपस्थित थे। आनंद शर्मा देर शाम बाबा काशी विश्वनाथ के दर्शन करने भी गए।