वाराणसी। गंगा की सफाई में जुटे सरकारी विभाग महज कागजी खानापूर्ति कर रहे हैं। यही कारण है कि वर्तमान के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और निर्माणाधीन एसटीपी बनकर तैयार भी हो जाएगा तो भी सीवर गंगा में जाने से रोक पाना मुश्किल है। कारण, वाराणसी के एसटीपी शहर से निकल रहे सीवर की क्षमता से कई गुना कम हैं। वर्तमान में केवल 100 एमएलडी सीवर का ही शोधन हो रहा है। जबकि 300 एमएलडी से ज्यादा का सीवर सीधे गंगा में जा रहा है। हालांकि नगर निगम का दावा है कि अब 32 नाले गंगा में गिर रहे हैं, जबकि हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
वाराणसी के नालों को गंगा में जाने से रोकने के लिए जो कदम उठाए जा रहे हैं, संभव है कि उससे थोड़ी राहत मिल जाए, मगर इसके दूरगामी परिणाम नहीं आएंगे। कारण, शहर में प्रतिदिन 400 एमएलडी सीवेज निकल रहा है और केवल 100 एमएलडी का शोधन हो पा रहा है। हालांकि गोइठहां, दीनापुर, और रमना में एसटीपी निर्माणाधीन है। मगर, इनके बन जाने के बाद भी पूरे शहर का सीवेज शोधन नहीं हो पाएगा। क्योंकि इनसे 260 एमएलडी सीवेज का शोधन और हो पाएगा। मतबल साफ है कि सभी एसटीपी बनने के बाद भी वर्तमान आंकड़ों के हिसाब से 60 एमएलडी सीवेज फिर भी बिना शोधन के ही गंगा में गिरेगा। सबसे अहम बात यह है कि शहर का हो रहे विस्तार से यह साफ है कि वर्तमान में निकलने वाले सीवेज में भी बढ़ोत्तरी होगी।