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निजीकरण के विरोध में अब इंजीनियर्स संगठन भी हुए शामिल0

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अमर उजाला ब्यूरो
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वाराणसी। निजीकरण के विरोध में कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति में अब इंजीनियर्स भी शामिल हो गए हैं। सोमवार से शुरू हुए तीन घंटे के इस आंदोलन में कर्मचारियों ने करो या मरो का नारा लगाया। इसके चलते बिजली विभाग की शाखाओं में दो से पांच बजे तक कोई काम नहीं हुआ। ऐसे में लोगों को परेशानी भी हुई।
प्रदेश सरकार के कैबिनेट में वाराणसी, लखनऊ, गोरखपुर, मेरठ और मुरादाबाद की बिजली को निजीकरण करने का फैसला लिया गया है। इस फैसले को लेने के बाद से ही कर्मचारियों ने विरोध शुरू कर दिया है। विद्युत मजदूर पंचायत के बैनर तले एमडी कार्यालय में दो बजे से धरना शुरू हुआ, जो पांच बजे तक चला। इसमें शहर भर के सभी उपकेन्द्रों के कर्मचारी शामिल हुए। प्रतिदिन तीन घंटे तक चलने वाले इस आन्दोलन में सभी कार्यालयों में कामकाज प्रभावित हो रहा है।
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वक्ताओं ने कहा कि वाराणसी में एटीसी नुकसान 30 प्रतिशत से कम होकर 17.5 हो गया है। तकनीकी हानियां का प्रतिशत भी मात्र छह से सात ही रह गया है। सरकार ने बिना बिक्री दर तय किए अगर निजी हाथों में विभाग को सौंप देगी तो जनता का शोषण होने लगेगा। ऐसे में सरकार को अब श्वेत पत्र जारी कर सरकार को निर्णय लेना चाहिए। कहा कि अगर यह फैसला सरकार वापस नहीं लेती है तो हम लोगों का आंदोलन और भी तेज होगा। बैठक की अध्यक्षता मुख्य अभियंता डीके सिंह, आर-आर प्रसाद, मायाशंकर तिवारी, एआरवर्मा, केदार तिवारी, अंकुर पांडेय, मनीष झा, वहीं इंजीनियर्र्स संगठन में आईपी सिंह, मुरलीधर समेत बड़ी संख्या में कर्मचारी और अधिकारी उपस्थित रहे। संचालन आरके वाही और संयोजन संघर्ष समिति की ओर से किया गया। बताया कि आंदोलन 26 तक चलेगा और 27 को पूर्णकालिक हड़ताल पर रहेंगे।
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