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प्रोन्नति मामले की जांच शुरू

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लखनऊ/वाराणसी। मुख्यमंत्री के सख्त रुख के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में निदेशक प्रकाशन संस्थान के पद पर फर्जी शासनादेश के आधार पर प्रोन्नति दिए जाने संबंधी शिकायत की जांच कराने का फैसला किया है। अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा के निर्देश पर विशेष सचिव उच्च शिक्षा नरेन्द्र शंकर पांडेय की अध्यक्षता में दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है। समिति में सदस्य केतौर पर ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी विश्वविद्यालय लखनऊ के रजिस्ट्रार एसके शुक्ला को शामिल किया गया है। इस आधार पर पांडेय ने विश्वविद्यालय केरजिस्ट्रार को सभी कागजात लेकर 27 फरवरी को लखनऊ तलब किया है।
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विश्वविद्यालय में प्रोन्नति के मामले की जांच की सूचना से हड़कंप मचा हुआ है। दरअसल विश्वविद्यालय में ही कार्यालय पंडित के पद पर तैनात डॉ. हरिबंश कुमार पांडेय ने 15 दिसंबर को मुख्यमंत्री को 6 पेज का शिकायती पत्र भेजा था। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था एक फर्जी शासनादेश के आधार पर डॉ. पद्माकर मिश्र को निदेशक प्रकाशन संस्थान के पद प्रोन्नति दे गई ही। अपने इस आरोप के साक्ष्य के तौर पर पांडेय ने जन सूचना अधिकार से जरिए शासन से प्राप्त वह कागजात भी मुख्यमंत्री को भेजा था, जिसके आधार पर उस शासनादेश को फर्जी बताया जा रहा है। पांडेय ने अपने आरोप ने स्पष्ट तौर पर लिखा है कि जिस शासनादेश संख्या -3556 / 1 / 70 -4/2003 के आधार पर पद्माकर को प्रोन्नति दी गई है, वह शासनादेश वास्तव में जारी नहीं हुआ है। वास्तव में वह शासन द्वारा जारी नहीं हुआ है। इसका खुलासा आरटीआई से मांगी गई सूचना में भी हो चुका है। शिकायत में पद्माकर के खिलाफ कुल 11 बिंदुओं में शिकायत की है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा को पूरे प्रकरण की जांच कराने का निर्देश देते हुए रिपोर्ट से सीएम कार्यालय को भी अवगत कराने को कहा है। चूंकि इस मामले पर सीएम दफ्तर की नजर है, इसलिए अपर मुख्य सचिव ने भी फौरी कार्रवाई करते हुए मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय टीम का गठन करते हुए 10 दिन में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। इस आधार पर जांच समिति केअध्यक्ष व विशेष सचिव उच्च शिक्षा नरेन्द्र शंकर पांडेय ने जांच शुरू कर दी है। इसके लिए 22 फरवरी को विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को तलब भी किया गया था, लेकिन उस दिन वह पूरे कागजात नहीं लाए थे। लिहाजा विशेष सचिव ने उन्हें फिर से 27 फरवरी को पूरे कागजात केसाथ समिति केसमक्ष उपस्थिति होने का निर्देश दिया है। विशेष सचिव ने रजिस्ट्रार से वह कागजात भी साथ लाने को कहा है, जिसका उल्लेख हरिवंश कुमार पांडेय की शिकायतों में किया गया है।
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